लाल खून का काला धंधा, सच जानकर उड़ जाएंगे होश 

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी को एकदम से खून की जरुरत पड़े। और उस मरीज को चढ़ाया गया खून नकली हो। जाहिर है पांव तले जमीन खिसक जाएगी। लेकिन ये सब आपकी नाक के नीचे चल रहा है। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन यानी FSDA की सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लखनऊ के ब्लड बैंकों में जो खून स्टोर किया गया है, वह ह्यूमन बॉडी के लिए फिट नहीं है, बल्कि जानलेवा है।

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ईला फाउंडेशन की छठी सालगिरह की धूम, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने बांधा समां

ILA FOUNDATION( I LOVE ALL) ये सूत्र वाक्य है इस फाउंडेशन का, जिसने 6 सालों में फर्श से अर्श तक का सफर पूरा किया। लाख मुश्किलें आई लेकिन ईला फाउंडेशन से जुड़े लोग टस से मस नहीं हुए और एक दूसरे की ताकत साबित हुए।

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एक नींबू बना सकता है मालामाल, बस लौंग के साथ आजमाएं, किस्मत चमक उठेगी

आप और हम नींबू का इस्तेमाल ज्यादातर नींबू पानी, सलाद, सब्जी में करते हैं। विटामिन सी से भरपूर नींबू मेंसाइट्रिक एसिड होता है जो शरीर के कई तरह के रोग को दूर करने में कारगर साबित होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि यही नींबू कई प्रकार की परेशानियों से छुटकारा भी दिला सकता है। नींबू का इस्तेमाल तमाम तरह के ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार नींबू से जुड़े कई ऐसे टोटके हैं जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं।

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5-12 साल के बच्चों की वैक्सीन को सरकार से मंजूरी, जानिए आपके बच्चे को कौन सी वैक्सीन लगेगी?

देश में कोरोना(CORONA) की रफ्तार एक बार फिर से बढ़ने लगी है। सबसे ज्यादा छोटे बच्चों के पैरेंट्स खौफ में है। ऐसे में सरकार की तरफ से एक अच्छी खबर सामने आई है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) की कोरोना वैक्सीन को DCGI ने मंजूरी दे दी है। DCGI ने 5-12 साल के बच्चों को Corbevax और 6-12 साल के बच्चों को Covaxin टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इससे पहले सरकार ने 12—17 साल के बच्चों को मंजूरी दी थी।

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गोलगप्पा खाने पर बैन, वजह सुनकर चौंक जाएंगे आप

अगर आप भी गोलगप्पे के शौकीन हैं तो थोड़ा संभलकर। भारत के पड़ोसी देश नेपाल से है। नेपाल (Nepal) सरकार ने राजधानी काठमांडू (Kathmandu) में गोलगप्पे पर बैन लगा दिया है। घाटी के ललितपुर मेट्रोपिलिटन सिटी (Lalitpur Metropolitan City) में हैजा के केस बढ़ने के बाद यह फैसला किया  गया है। दावा किया गया है कि पानी-पूरी में इस्तेमाल होनें वाले पानी में कॉलरा बैक्टीरिया पाया गया है।

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