Bihar News: राज्य सरकार ने बच्चों के कल्याण और महिलाओं के रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा सिला हुआ पोशाक देने की योजना की शुरुआत हो चुकी है। अब इसी मॉडल पर प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को भी पोशाक उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।
कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को भी मिलेगी जीविका दीदी की पोशाक
ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार ने घोषणा की कि आंगनवाड़ी केंद्रों की तर्ज पर अब कक्षा 1 से 5 तक के स्कूली बच्चों को भी जीविका दीदियों द्वारा सिला हुआ पोशाक दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। इस पहल से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोशाक मिलेगी और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोशाक वितरण का संयुक्त शुभारंभ
दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार और समाज कल्याण मंत्री श्री मदन साहनी ने संयुक्त रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोशाक वितरित की। इस दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। पोशाक प्राप्त करने वाले बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी, जिससे कार्यक्रम का उद्देश्य स्पष्ट दिखाई दिया।

मार्च तक पचास लाख बच्चों को मिलेगी पोशाक
कार्यक्रम में बताया गया कि फिलहाल करीब 50 लाख आंगनवाड़ी बच्चों के लिए पोशाक का निर्माण किया जा रहा है और मार्च तक सभी बच्चों को पोशाक उपलब्ध करा दी जाएगी। यह योजना समयबद्ध तरीके से लागू की जा रही है ताकि किसी भी बच्चे को योजना के लाभ से वंचित न रहना पड़े। आगामी वर्षों के लिए भी पहले से तैयारी शुरू कर दी जाएगी।
पोशाक निर्माण से लाखों महिलाओं को मिल रहा रोजगार
मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पोशाक निर्माण एक मजबूत माध्यम बन रहा है। वर्तमान में करीब एक लाख महिलाएं 1050 सिलाई केंद्रों के माध्यम से इस कार्य से जुड़ी हैं। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ाकर पांच लाख से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जीविका से सशक्त हो रही ग्रामीण और शहरी महिलाएं
जीविका की शुरुआत वर्ष 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से की गई थी। आज राज्य में 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक करोड़ चालीस लाख से अधिक महिलाएं इससे जुड़ चुकी हैं। यह न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और कुरीतियों के खिलाफ भी एक मजबूत मंच के रूप में उभरा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण व्यवस्था होगी और मजबूत
समाज कल्याण मंत्री श्री मदन साहनी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा और रोजाना दूध दिया जा रहा है। पोशाक मिलने से बच्चों में समानता की भावना विकसित होगी। उन्होंने सेविकाओं और सहायिकाओं से बच्चों की देखभाल और पोषण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया ताकि कुपोषण में प्रभावी सुधार हो सके।

सामग्री आधारित योजनाओं से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार
ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव श्री पंकज कुमार ने कहा कि राशि देने के बजाय सामग्री उपलब्ध कराने की योजना अधिक प्रभावी सिद्ध हो रही है। इससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोशाक मिलती है और पैसे के दुरुपयोग की संभावना भी खत्म होती है। साथ ही इससे गांवों में उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
मार्च तक सभी बच्चों को मिलेगा लाभ
समाज कल्याण विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी ने कहा कि जीविका दीदियों ने कम समय में 50 लाख बच्चों के लिए पोशाक तैयार कर एक मिसाल पेश की है। मार्च तक सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोशाक मिल जाएगी। योजना के तहत प्रत्येक बच्चे को साल में दो पोशाक दी जाएंगी जिससे उनकी नियमित जरूरतें पूरी होंगी।
तकनीक से निगरानी और प्रशिक्षण को मिला बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान स्टिच मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़े मोबाइल ऐप और सॉफ्टवेयर का भी विमोचन किया गया। इसके साथ ही सिलाई प्रशिक्षण और उत्पादन पुस्तिका जारी की गई। जीविका के अधिकारियों ने बताया कि तकनीक के माध्यम से उत्पादन की गुणवत्ता और समयसीमा पर बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी।
