Bihar

Bihar News: पशुओं को खाने में न दें बाढ़ में डूबी घास एवं पहले का भीगा हुआ भूसा

बिहार राजनीति
Spread the love

बाढ़ एवं बरसात में पशुओं की सुरक्षा के लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने जारी की सलाह

बाढ़ के दौरान पशुओं को रखने की व्यवस्था ऊंचे स्थान पर करें

पशुशाला को अत्यधिक नमी से बचाने के लिए चूने का करें छिड़काव

बारिश के दौरान पशुओं को न निकाले बाहर

Bihar News: बरसात के मौसम और बाढ़ के समय जान-माल को नुकसान होने की संभवना अधिक रहती है। पशुपालन से जुड़े किसानों को इससे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने सलाह जारी की है। इसमें विभाग ने कहा है कि पशुओं को बाढ़ में डूबी घास एवं पहले का भीगा हुआ भूसा खाने में न दें।

ये भी पढ़ें: Bihar: 22 करोड़ की लागत से पूर्णिया में NH-107 से काझी पथ का चौड़ीकरण- मजबूतीकरण को स्वीकृति – सम्राट चौधरी

विभाग ने जारी सलाह में कहा है कि बाढ़ आने की स्थिति में पशु को रखने की व्यवस्था ऊंचे स्थान पर करना चाहिए, जहां जल निकास की उचित व्यवस्था हो ताकि पशु परिसर साफ एवं सूखा रहे तथा गर्मी एवं नमी जनित रोगों से पशुओं को बचाया जा सकें। पशुशाला को साफ एवं स्वच्छ रखने के लिये समय-समय पर कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए। पशु गृह को अत्यधिक नमी से बचाने के लिए पशुशाला में चूने का छिड़काव करना चाहिए।

साथ ही, पशुओं को संतुलित आहार तथा साफ एवं ताजा पानी उपलब्ध कराना चाहिए। अंतःपरजीवी एवं बाह्य परजीवी का प्रकोप इस समय काफी होता है। इनसे बचाव के लिए सभी पशुओं में कृमिनाशक दवा का उपयोग अवश्य करना चाहिए। बाढ़ के समय मृत पशुओं से कई प्रकार की बीमारियां फैलने की संभावना अधिक होती है, इसलिए मृत पशुओं का निस्तारण सावधानीपूर्वक करें। बीमार एवं घायल पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए एवं उपचार हेतु पशु चिकित्सक से सम्पर्क स्थापित करना चाहिए।

ये भी पढ़ें: Bihar News: हीरो एशिया कप राजगीर 2025 तैयारियां जोरों पर

बारिश में रखें इन बातों का ध्यान

विभाग ने बारिश के दौरान पशुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है। सलाह दी गई है कि बरसात में पशुशाला की खिड़कियां खुली रखें तथा गर्मी एवं उमस से बचने के लिये पंखों का उपयोग करें। पशुशाला में पशुओं के मल-मूत्र की निकासी का भी उचित प्रबंधन करें। बारिश के दौरान पशुओं को बाहर न निकालें। पानी को एक जगह पर एकत्रित नहीं होने दें, जिससे मच्छड़ का प्रकोप न हो एवं परजीवी संक्रमण को रोका जा सके। पशुपालक किसान विभाग द्वारा जारी सलाह को मानकर पशु संसाधनों की होने वाली क्षति से बच सकते हैं।