Bihar News: बिहार सरकार राज्य में गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग को मजबूत बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है। इसी दिशा में पटना के ज्ञान भवन में गन्ना उद्योग विभाग की ओर से दो दिवसीय गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के मंत्री, अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary, Vijay Kumar Sinha, उद्योग मंत्री Dilip Kumar Jaiswal और मुख्य सचिव Pratyay Amrit ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गन्ना उद्योग मंत्री Sanjay Kumar ने की।
उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आएगी नई इंसेंटिव पॉलिसी
सेमिनार को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही इंसेंटिव पॉलिसी 2026 लाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस नीति के माध्यम से बिहार में नए उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जो लोग रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाते हैं, उन्हें आने वाले वर्षों में बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
बंद चीनी मिलों को फिर शुरू करने की योजना
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आजादी के समय बिहार गन्ना उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में था, लेकिन समय के साथ कई चीनी मिलें बंद हो गईं।
उन्होंने कहा कि पहले राज्य में 16 चीनी मिलें थीं, जिनमें से कई बंद हो गईं। वर्तमान में करीब 10 चीनी मिलें ही काम कर रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू किया जाए और उद्योग को नई गति दी जाए।
25 नई चीनी मिलें लगाने का संकल्प
उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार की जमीन गन्ने की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है। उन्होंने बताया कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए पहले से औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना और एथनॉल प्रोत्साहन नीति लागू की गई है।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करना और राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि उद्योगों के विकास को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया गया है।
किसानों के लिए योजनाएं और बढ़ा गन्ने का मूल्य
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि किसानों के हित में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए गन्ने का मूल्य भी बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पांच एकड़ तक मुफ्त बीज दिए जा रहे हैं और खेती के लिए मशीनों पर अनुदान भी दिया जा रहा है। इसके अलावा जलजमाव की समस्या से प्रभावित लगभग 66 हजार एकड़ जमीन को मुक्त कराने के लिए भी काम किया जा रहा है।
किसानों और वैज्ञानिकों ने साझा किए अनुभव
इस दो दिवसीय सेमिनार में देश के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हुए। पहले दिन लगभग 700 किसानों और 100 वैज्ञानिकों ने इसमें भाग लिया।
कार्यक्रम में गन्ने की बेहतर खेती, नई तकनीक, कीट नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिकों और किसानों के सहयोग से गन्ना उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है और बिहार को फिर से चीनी उत्पादन में अग्रणी बनाया जा सकता है।
