Bihar News: पटना, 17 जुलाई। बिहार में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट का पहला मॉक ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया। गृह विभाग के नेतृत्व में विकसित इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।
पटना की अदालत में हुआ पहला सफल मॉक ट्रायल
गृह विभाग के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-23 गौरव कुमार की अदालत में एक मामले का चयन कर मॉक ट्रायल किया गया। इस प्रक्रिया में अभियोजन कार्यालय, बेऊर स्थित आदर्श केंद्रीय कारा, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) और अन्य संबंधित इकाइयों को एक डिजिटल मंच पर जोड़ा गया। ट्रायल का तकनीकी संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा किया गया।
डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी गवाही
‘न्यायश्रुति’ प्रणाली के तहत गवाहों, पुलिस अधिकारियों, जेल में बंद कैदियों और फोरेंसिक विशेषज्ञों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल माध्यम से अपनी गवाही दर्ज करा सकेंगे। इससे न्यायिक प्रक्रिया में समय और संसाधनों की बचत होने के साथ सुनवाई की गति भी बढ़ेगी।
लंबित मामलों के जल्द निपटारे में मिलेगी मदद
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण में सहायता मिलेगी। साथ ही, अदालतों में बार-बार पेशी और संबंधित पक्षों की आवाजाही कम होने से न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुगम बन सकेगी।
चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में होगा विस्तार
सफल पायलट ट्रायल के बाद गृह विभाग ने संकेत दिए हैं कि ‘न्यायश्रुति’ प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से बिहार की अन्य जिला अदालतों में भी लागू किया जाएगा। विभाग के अनुसार, यह पहल नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ राज्य की न्याय व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
डिजिटल न्याय व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
गृह विभाग का कहना है कि न्यायश्रुति प्रणाली के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी प्रमुख घटकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे आम लोगों को अधिक तेज, सुलभ और पारदर्शी न्याय उपलब्ध कराने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
