Bihar News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत चयनित फेलोज़ के लिए गुरुवार को पटना के अधिवेशन भवन में ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को प्रशासन, नीति निर्माण और सुशासन की प्रक्रियाओं से जोड़ते हुए “विकसित बिहार 2047” के लक्ष्य में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
विकसित बिहार 2047 के निर्माण में निभाएंगे अहम भूमिका
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (BPSMS) के मिशन निदेशक डॉ. बी. राजेन्दर ने कहा कि मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना केवल एक नियुक्ति प्रक्रिया नहीं, बल्कि सीखने और प्रशासन में योगदान देने का अनूठा मंच है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित बिहार के निर्माण की परिकल्पना को साकार करने में मुख्यमंत्री फेलोज़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह योजना युवाओं को शासन व्यवस्था को समझने और जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का अवसर प्रदान करेगी।
राष्ट्र निर्माण की भावना से करें कार्य
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने फेलोज़ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक बदलाव और विकास की वास्तविक तस्वीर जमीनी स्तर पर दिखाई देती है। उन्होंने सहयोग शिविरों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि फेलोज़ को अपने कार्य को राष्ट्र सेवा की भावना से करना चाहिए।
उन्होंने भारत आर्थिक सर्वेक्षण और बिहार आर्थिक सर्वेक्षण जैसे दस्तावेजों का अध्ययन करने की भी सलाह दी।
क्या है मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना?
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना को 9 सितंबर 2025 को राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिली थी। इसका उद्देश्य प्रशासनिक सुधार, क्षमता निर्माण, नवाचार और बेहतर नीति क्रियान्वयन को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत प्रतिभाशाली युवाओं और विषय विशेषज्ञों को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ काम करने का अवसर दिया जा रहा है, ताकि वे नीति निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष योगदान दे सकें।
IIM बोधगया के सहयोग से चल रही योजना
बिहार सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बोधगया के सहयोग से इस कार्यक्रम को तैयार किया है। योजना का उद्देश्य सुशासन को मजबूत करना, योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाना और शासन प्रणाली में नवाचार को बढ़ावा देना है।
106 उम्मीदवारों का हुआ चयन
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के तहत कुल 121 पदों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई थी। कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद 106 उम्मीदवारों को फेलो के रूप में चुना गया है।
इनमें अर्ली और मिड-कैरियर प्रोफेशनल्स को दो वर्षों के लिए विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर तैनात किया जाएगा।
फेलोज़ को मिलेगा आकर्षक मानदेय
योजना के तहत विभिन्न पदों पर कार्यरत फेलोज़ को अलग-अलग मानदेय दिया जाएगा—
- मुख्यमंत्री सचिवालय एवं उपमुख्यमंत्री कार्यालय: ₹1.50 लाख प्रतिमाह
- मुख्य सचिव एवं विकास आयुक्त कार्यालय: ₹1.25 लाख प्रतिमाह
- सचिवालय के विभिन्न विभाग: ₹1 लाख प्रतिमाह
- प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त कार्यालय: ₹80,000 प्रतिमाह
युवाओं को मिलेगा प्रशासनिक अनुभव
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान चयनित फेलोज़ को उनकी जिम्मेदारियों, कार्य प्रणाली, प्रशासनिक ढांचे और अपेक्षाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। सरकार का मानना है कि यह योजना युवाओं को शासन व्यवस्था का व्यावहारिक अनुभव देने के साथ-साथ राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करेगी।
बिहार में सुशासन को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना को बिहार में सुशासन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पेशेवरों की भागीदारी से नीति निर्माण, निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में नई ऊर्जा आएगी।
विकसित बिहार 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में यह योजना राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रही है।
