Bihar News: पटना के प्रतिष्ठित बापू टावर में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में देश की प्रसिद्ध संग्रहालयविद (Museologist) अवनी सेठी ने संग्रहालयों की बदलती भूमिका और उनकी समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। ‘प्रश्न के रूप में म्यूजियम’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने संग्रहालयों को केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रह तक सीमित न मानते हुए उन्हें समाज के महत्वपूर्ण प्रश्नों और संवादों का जीवंत मंच बताया।
संग्रहालयों की पारंपरिक सोच को चुनौती
अपने व्याख्यान में अवनी सेठी ने कहा कि आमतौर पर संग्रहालयों को अतीत की वस्तुओं को संरक्षित करने वाले स्थान के रूप में देखा जाता है, लेकिन आधुनिक दौर में उनकी भूमिका इससे कहीं अधिक व्यापक हो गई है।
उन्होंने कहा कि आज के संग्रहालय केवल इतिहास को प्रदर्शित करने के केंद्र नहीं, बल्कि समाज के सामने मौजूद ज्वलंत मुद्दों, संघर्षों और सवालों पर विचार-विमर्श के मंच भी बनने चाहिए। संग्रहालयों को लोगों के बीच संवाद स्थापित करने और सामाजिक समझ विकसित करने का माध्यम बनना होगा।
‘कॉन्फ्लिक्टोरियम’ की कहानी और अनुभव साझा किए
व्याख्यान के दौरान अवनी सेठी ने अहमदाबाद और रायपुर में स्थापित अपने चर्चित ‘कॉन्फ्लिक्टोरियम म्यूजियम’ की यात्रा और अनुभवों को साझा किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में अहमदाबाद में शुरू किए गए इस अनूठे संग्रहालय का उद्देश्य समाज में मौजूद संघर्षों, मतभेदों और संवेदनशील मुद्दों को संवाद और समझ के माध्यम से देखने की नई दृष्टि प्रदान करना था। इस पहल को देशभर में सराहना मिली और संग्रहालयों की पारंपरिक अवधारणा पर नई चर्चा शुरू हुई।
बापू टावर की सराहना
अवनी सेठी ने पटना स्थित बापू टावर का भ्रमण करने के बाद इसकी विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के विचारों और जीवन दर्शन को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक है।
उनके अनुसार, बापू टावर केवल एक स्मारक नहीं बल्कि नई पीढ़ी को गांधीवादी मूल्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र है।
इतिहासकार इम्तियाज अहमद ने बताया ज्ञानवर्धक व्याख्यान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात इतिहासकार प्रोफेसर इम्तियाज अहमद ने अवनी सेठी के व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक और विचारोत्तेजक बताया।
उन्होंने कहा कि इस व्याख्यान से संग्रहालयों की भूमिका और उनके सामाजिक महत्व को लेकर उनकी समझ और अधिक व्यापक हुई है। संग्रहालयों के बारे में प्रचलित धारणाओं से आगे बढ़कर नए दृष्टिकोण पर विचार करने का अवसर मिला।
बापू टावर में आगे भी होंगे ऐसे कार्यक्रम
बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने कहा कि संग्रहालयों के विविध और कम चर्चित पहलुओं को समाज के सामने लाने के लिए भविष्य में भी ऐसे बौद्धिक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि बापू टावर का उद्देश्य केवल महात्मा गांधी के जीवन और विचारों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि समाज में ज्ञान, विमर्श और बौद्धिक संवाद की संस्कृति को भी बढ़ावा देना है।
बड़ी संख्या में जुटे बुद्धिजीवी और इतिहास प्रेमी
कार्यक्रम में पटना के बुद्धिजीवियों, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। बापू टावर के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक ललित कुमार सिंह ने किया, जबकि अंत में प्रशाखा पदाधिकारी प्रत्यूष चंद्र मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
संग्रहालयों को नए नजरिए से देखने की जरूरत
बापू टावर में आयोजित यह व्याख्यान इस बात की याद दिलाता है कि आधुनिक समय में संग्रहालय केवल अतीत की धरोहरों को सहेजने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे समाज, संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देने वाले सशक्त मंच भी बन सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम संग्रहालयों को जनसामान्य से जोड़ने और उन्हें अधिक जीवंत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
