क्रिसिल ने घटाई अपोलो ग्रीन एनर्जी की रेटिंग, बॉन्ड धारकों को भुगतान में देरी का आरोप
Apollo Green Energy: क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कंपनी के खातों में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए इसके 330 करोड़ रुपये के बैंक कर्ज़ की रेटिंग घटा दी है। Money Control.com में छपी रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा दौर में अपोलो ग्रीन एनर्जी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। बॉन्ड धारकों को भुगतान में देरी हो रही है और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां इसकी कर्ज़ साख घटा रही हैं।


पिछले हफ्ते कंपनी ने कुछ बॉन्ड धारकों को लिखित संदेश भेजा था कि ब्याज भुगतान जल्द कर दिया जाएगा, जबकि मूलधन और बकाया ब्याज अगले 70–75 दिनों में चुका दिया जाएगा।
यह संदेश दो साल की नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) से जुड़ा था, जिसकी मियाद 19 जुलाई 2025 को पूरी हो गई थी। इससे कंपनी ने 6 करोड़ रुपये जुटाए थे।
कंपनी ने लिखा—
“हमें खुशी है कि ब्याज भुगतान अगले हफ्ते कर दिया जाएगा। मूलधन और बकाया ब्याज भी अगले 70–75 दिनों में चुका दिया जाएगा। हम समय पर भुगतान की अहमियत समझते हैं और सभी दायित्व पूरे करेंगे।”अपोलो ग्रीन ने इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।
एनएसडीएल (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की शुरुआत से ही आईएल&एफएस समूह और फ्यूचर कंज़्यूमर की कम से कम 10 डिबेंचर सीरीज़ समय पर नहीं चुकाई गई हैं।
कंपनी आईपीओ लाने की योजना बना रही थी ताकि विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाया जा सके। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का शुद्ध लाभ 44.36 करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 50% ज़्यादा है। शेयरधारकों के लिए 15% डिविडेंड की सिफारिश भी की गई। कंपनी के पास 400 मेगावॉट सौर क्षमता और 3,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है। लक्ष्य है कि 2026 तक 1 गीगावॉट (GW) ऑर्डर बुक हासिल की जाए।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की सख़्ती
मजबूत वित्तीय आँकड़ों और ऑर्डर बुक के बावजूद क्रेडिट एजेंसियों ने सतर्क रुख़ अपनाया है। एजेंसियों ने कंपनी के दीर्घकालिक और अल्पकालिक कर्ज़ की रेटिंग घटाकर “D” कर दी है। इसका मतलब है कंपनी भुगतान में डिफॉल्ट कर रही है या जल्द करेगी। क्रिसिल ने कहा कि कंपनी खातों के संचालन में गड़बड़ी कर रही है। लंबी अवधि की रेटिंग “क्रिसिल बी” से घटाकर “क्रिसिल डी” कर दी गई है। यह बदलाव बताता है कि कंपनी की स्थिति कमजोर क्षमता से निकलकर सीधे डिफॉल्ट तक पहुँच गई है।
क्रिसिल के मुताबिक कंपनी से जानकारी लेने की कोशिश 9 और 19 सितंबर 2025 को चिट्ठियों और कॉल्स से की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अपोलो ग्रीन को कर्ज़ देने वालों में एसबीआई, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं। इंफोमेरिक्स (Infomerics) ने भी 322.83 करोड़ के बैंक कर्ज़ और 100 करोड़ के एनसीडी की रेटिंग घटा दी। एजेंसी का कहना है कि मई 2025 से कंपनी “नो डिफॉल्ट स्टेटमेंट” नहीं दे रही है। आउटलुक “निगेटिव” बना हुआ है।
पूंजी जुटाने की कोशिशें
अगस्त 2025 में कंपनी ने शेयरधारकों से मंज़ूरी मांगी थी कि 1,500 करोड़ रुपये की गारंटी, लोन और सिक्योरिटी ग्रुप की दूसरी कंपनियों को दी जा सके। जनवरी 2025 में बोर्ड ने 4,110 करोड़ रुपये के प्राइवेट प्लेसमेंट का भी प्रस्ताव दिया था, लेकिन जुलाई तक कंपनी सिर्फ 78 करोड़ रुपये ही जुटा सकी।
कंपनी का इतिहास
अपोलो ग्रीन एनर्जी की शुरुआत 1994 में गुड़गांव, हरियाणा में “अपोलो इंटरनेशनल लिमिटेड” के रूप में हुई थी। यह मूल रूप से अपोलो टायर्स का निर्यात विभाग था। बाद में कंपनी ने लेदर गारमेंट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कदम रखा।
2023 में कंपनी का नाम बदलकर “अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड” कर दिया गया, ताकि ध्यान पूरी तरह ग्रीन और सतत ऊर्जा परियोजनाओं पर दिया जा सके।

Disclaimer: moneycontrol.com में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ख़बर प्रकाशित की गई है।
