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UP News:भूजल सप्ताह-2026: सहजन के बीज और ज्वालामुखीय पत्थर से बच सकता है लाखों लीटर पानी, यूपी में नई तकनीक पर होगा शोध

उत्तरप्रदेश
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UP News: लखनऊ, 17 जुलाई। उत्तर प्रदेश में भूजल सप्ताह-2026 के तहत जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को भूगर्भ जल विभाग ने ‘जल-संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में घरेलू आरओ (RO) सिस्टम से निकलने वाले बेकार पानी को बचाने के लिए प्राकृतिक तकनीकों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि मोरिंगा (सहजन) के बीज और स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक (छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर) जल शोधन में उपयोगी साबित हो सकते हैं। विभाग ने इस तकनीक पर आगे शोध और प्रोटोटाइप विकसित करने में रुचि दिखाई है।

आरओ के बेकार पानी को बचाने की दिशा में नई पहल

‘जल-संवाद’ कार्यक्रम की अध्यक्षता भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने की। इस दौरान कम लागत वाली प्राकृतिक जल शोधन तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित किया जाता है तो आरओ सिस्टम से प्रतिदिन बेकार होने वाले लाखों लीटर पानी को उपयोग में लाया जा सकता है।

कैसे काम करेंगे सहजन के बीज और स्कोरिया रॉक

विशेषज्ञों ने बताया कि मोरिंगा (सहजन) के बीजों का पाउडर पानी में मौजूद गंदगी और सूक्ष्म कणों को एकत्र कर नीचे बैठाने में मदद करता है। वहीं स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक अपनी छिद्रयुक्त संरचना के कारण प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम कर अशुद्धियों को कम करने में सहायक हो सकती है। हालांकि इस तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण और शोध किए जाएंगे।

जल संरक्षण के लिए पुरस्कार और नई तकनीकों पर जोर

कार्यक्रम में विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने सुझाव दिया कि जिन गांवों, शहरों और आवासीय सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं, उन्हें विशेष प्रोत्साहन और पुरस्कार दिए जाएं। इसके अलावा रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के माध्यम से भूजल संरक्षण और जल भंडारण की मैपिंग को भी अभियान से जोड़ने की बात कही गई।

जल सुरक्षा के लिए जनभागीदारी जरूरी

भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से जल संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने और जल संसाधनों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।