Punjab News: चंडीगढ़, 15 जुलाई। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पिछले छह महीनों में 914 स्ट्रोक मरीजों का ₹4.15 करोड़ की लागत से कैशलेस इलाज किया गया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्ट्रोक जैसी मेडिकल इमरजेंसी में इलाज में एक-एक मिनट की देरी जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए किसी भी परिवार को आर्थिक कारणों से उपचार टालना नहीं चाहिए। सरकार का उद्देश्य है कि हर मरीज को समय पर जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध कराया जाए।
स्ट्रोक इलाज पर ₹4.15 करोड़ खर्च, 914 मरीजों को मिला लाभ
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का उपचार किया गया। इनमें एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के सबसे अधिक मामले सामने आए। जटिल मामलों में सीटी स्कैन, एमआरआई, आईसीयू, ट्रेकियोस्टॉमी और अन्य उन्नत उपचार सुविधाओं का भी लाभ मरीजों को दिया गया।
‘हर मिनट कीमती है, आर्थिक चिंता इलाज में बाधा न बने’
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार केवल पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी न करे। स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाने और स्थायी विकलांगता से बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
स्ट्रोक के प्रमुख कारण और बचाव के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं। अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, चेहरे का टेढ़ा होना या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से मरीज के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सरकार का फोकस— समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं
पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से महंगे इलाज का आर्थिक बोझ कम किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद मरीज बिना किसी वित्तीय चिंता के समय पर उपचार प्राप्त कर सकें। सरकार ने लोगों से अपील की है कि स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें और इलाज में बिल्कुल भी देरी न करें।
