Jharkhand News: रांची, 1 जुलाई 2026: हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वीर क्रांतिकारी सिद्धो-कान्हू सहित संथाल हूल आंदोलन के सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इन महान योद्धाओं का संघर्ष केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि न्याय, स्वाभिमान और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का अमर संदेश है।
सिद्धो-कान्हू के बलिदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1855 का संथाल हूल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में से एक था। सिद्धो-कान्हू, चांद और भैरव सहित हजारों आदिवासी वीरों ने अंग्रेजी शासन और शोषण के खिलाफ संघर्ष कर आने वाली पीढ़ियों को आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा दी।
आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा का संकल्प
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड सरकार राज्य के आदिवासी समुदायों की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों का झारखंड तभी साकार होगा, जब विकास के साथ सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे।
युवाओं से शहीदों के आदर्श अपनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं से सिद्धो-कान्हू और अन्य हूल नायकों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए साहस, एकता और न्याय के मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है।
हूल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
हर वर्ष 30 जून को मनाया जाने वाला हूल दिवस संथाल विद्रोह की याद में आयोजित किया जाता है। यह दिन आदिवासी समाज के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है तथा झारखंड सहित कई राज्यों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
