Punjab News: चंडीगढ़, 26 जून। पंजाब राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन बाल मुकंद शर्मा ने शुक्रवार को लेखिका रावी पंधेर की पुस्तक ‘लेटर्स टू माई डॉटर्स’ का विमोचन किया। यह पुस्तक एक मां के प्रेम, भावनाओं, अनुभवों और जीवन की सीख को अपनी बेटियों के नाम लिखे गए पत्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में आयोग के सदस्यों और अन्य अधिकारियों की भी उपस्थिति रही।
मां-बेटी के रिश्ते की भावनात्मक कहानी
पुस्तक के विमोचन के दौरान बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि ‘लेटर्स टू माई डॉटर्स’ केवल एक किताब नहीं, बल्कि एक मां के दिल की आवाज है। इसमें मां की भावनाएं, उम्मीदें, चिंताएं और जीवन के महत्वपूर्ण अनुभव बेहद सरल और भावपूर्ण तरीके से पत्रों के रूप में लिखे गए हैं। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में ऐसी किताबें रिश्तों की अहमियत और परिवार के मूल्यों की याद दिलाती हैं।
बेटियां समाज का गौरव हैं
बाल मुकंद शर्मा ने कहा कि बेटियां समाज और परिवार का गौरव हैं। उन्होंने बताया कि मां ही बच्चों के जीवन में संस्कार, हौसला और पहचान की सबसे मजबूत नींव रखती है। उनके अनुसार यह पुस्तक हर उस मां की भावनाओं को सामने लाती है, जो अपने बच्चों के लिए बेहतर जीवन और अच्छे संस्कार छोड़कर जाना चाहती है। साथ ही यह हर बेटी को अपनी जड़ों और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश भी देती है।
महिलाओं का लेखन समाज को करता है समृद्ध
कार्यक्रम में चेयरमैन ने रावी पंधेर की सराहना करते हुए कहा कि जब महिलाएं अपने जीवन के अनुभवों को शब्दों में ढालती हैं तो समाज और साहित्य दोनों समृद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं और परिवार तथा समाज के बीच भावनात्मक संबंधों को मजबूत करती हैं।
लेखिका ने बताया किताब लिखने का उद्देश्य
लेखिका रावी पंधेर ने कहा कि यह पुस्तक उन बातों को संजोने का प्रयास है, जो अक्सर मां और बेटियों के बीच कहे बिना ही रह जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह किताब मातृत्व के निःस्वार्थ प्रेम, मौन त्याग, साहस और भावनात्मक रिश्तों को समर्पित है। उन्होंने साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए बाल मुकंद शर्मा का भी आभार व्यक्त किया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
पुस्तक विमोचन समारोह में पंजाब राज्य खाद्य आयोग के सदस्य जसवीर सिंह सेखों, विजय दत्त, चेतन प्रकाश धालीवाल तथा सदस्य सचिव कनु थिंद भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पुस्तक को मां-बेटी के रिश्ते को समझने और पारिवारिक मूल्यों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति बताया।
