Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। दोनों नेताओं ने जैन मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त किया और आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हो रहे पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज को नमन किया।
इस अवसर पर देशभर से आए संत, साध्वी, श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा के वातावरण से भर दिया।
भगवान महावीर के विचार आज भी प्रासंगिक
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि आचार्य पद केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को दिशा देने वाली सर्वोच्च साधना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और जैन दर्शन के सिद्धांत आज भी मानवता को शांति, आत्मसंयम, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं। वर्तमान समय में जब दुनिया तनाव और संघर्षों से जूझ रही है, तब जैन दर्शन का संदेश पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
विनयकुशल मुनि का आचार्य पदारोहण गौरव का क्षण
श्री बिरला ने कहा कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पद पर प्रतिष्ठित होना पूरे जैन समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने शतावधानी हंसभद्र मुनि जी महाराज की विलक्षण स्मरण शक्ति और साधना की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाएं केवल आराम दे सकती हैं, लेकिन जीवन का वास्तविक आनंद आत्मनियंत्रण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना से ही प्राप्त होता है।
छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण अवसर
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार आयोजित हो रहा यह आचार्य पदारोहण महोत्सव पूरे प्रदेश के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा, साधना और संस्कृति का यह विराट आयोजन प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना का नया संचार कर रहा है। देशभर से आए संतों और श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन से छत्तीसगढ़ धन्य हुआ है।
जैन संतों का संदेश आज की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पद पर आरोहण उनके ज्ञान, तप, संयम और समाज सेवा के प्रति समर्पण का सम्मान है।
उन्होंने 14 वर्षीय बाल मुनि शतावधानी हंसभद्रमुनि जी महाराज की अद्भुत स्मरण शक्ति और साधना को भी प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक साथ हजार प्रश्नों को याद रखना और क्रमवार उत्तर देना असाधारण उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि जैन संतों ने हमेशा अहिंसा, करुणा, सत्य और आत्मसंयम का संदेश दिया है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
‘जियो और जीने दो’ का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का “जियो और जीने दो” का संदेश आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। यह संदेश समाज में शांति, सहिष्णुता और भाईचारे को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि है तथा राज्य सरकार सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
संतों की तपस्या समाज के लिए प्रेरणा
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जैन मुनि कठिन तप, उपवास और संयम के माध्यम से समाज को प्रेरित करते हैं। उन्होंने लंबी पदयात्रा कर रायपुर पहुंचे साधु-संतों का स्वागत किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि जैन संतों का त्याग, तपस्या और अनुशासित जीवन समाज के लिए हमेशा प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन लोगों को आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ रायपुर
आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को शांति, संयम और मानवता का संदेश देने वाला प्रेरणादायी कार्यक्रम बन गया। रायपुर में आयोजित इस महोत्सव ने आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को नई मजबूती प्रदान की है।
