Noida: ग्रेटर नोएडा में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत बच्चों के दाखिले को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने में लापरवाही और शिकायतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए 32 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। इन स्कूलों को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली विशेष बैठक में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
4,330 सीटें आवंटित, लेकिन अभी भी सैकड़ों बच्चों का दाखिला बाकी
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में आरटीई के तहत 4,330 बच्चों को निजी स्कूलों में सीटें आवंटित की गई थीं, लेकिन अब तक केवल 3,380 बच्चों का ही दाखिला हो पाया है। बड़ी संख्या में बच्चों के प्रवेश लंबित होने के कारण अभिभावकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
डीएम की बैठक में स्कूलों से मांगा जाएगा जवाब
बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने बताया कि नोटिस जारी किए गए सभी स्कूलों को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में उपस्थित होना होगा। स्कूल प्रबंधन को यह बताना पड़ेगा कि आरटीई के तहत कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितने मामलों में दाखिला लंबित है। बैठक में अभिभावकों को भी बुलाया गया है ताकि वे सीधे प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रख सकें।
इन प्रमुख स्कूलों पर उठे सवाल
नोटिस पाने वाले स्कूलों में कई बड़े और प्रतिष्ठित निजी विद्यालय शामिल हैं। इनमें डीपीएस, बिलाबॉन्ग हाई इंटरनेशनल स्कूल, लोटस वैली इंटरनेशनल स्कूल, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, शिव नाडर स्कूल, बाल भारती पब्लिक स्कूल, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, रामाज्ञा स्कूल, फॉर्च्यून वर्ल्ड स्कूल, स्टेप बाय स्टेप स्कूल, प्रेजिडियम स्कूल और केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल समेत कुल 32 संस्थान शामिल हैं।
लगातार मिल रही थीं अभिभावकों की शिकायतें
शिक्षा विभाग का कहना है कि कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि आरटीई के तहत सीट आवंटित होने के बावजूद स्कूल बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं या प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कर रहे हैं। इसी वजह से प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। इससे पहले भी कई स्कूलों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और चेतावनी दी गई थी कि नियमों का पालन नहीं करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई संभव
प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि स्कूल आरटीई नियमों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है। पूर्व में भी शिक्षा विभाग ने कई स्कूलों को मान्यता रद्द करने की चेतावनी दी थी। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश देना सभी निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य है।
आरटीई व्यवस्था पर बढ़ा प्रशासनिक दबाव
गौतमबुद्ध नगर में पिछले कुछ महीनों से आरटीई दाखिलों को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। इससे पहले भी लंबित दाखिलों को लेकर जिलाधिकारी स्तर पर बैठकों का आयोजन किया जा चुका है और स्कूलों को निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
बच्चों के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं
प्रशासन का कहना है कि किसी भी पात्र बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। आरटीई कानून का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और इसके क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
