ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित 14th Avenue Society में आवारा कुत्तों को लेकर निवासियों के बीच डर और चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर रविवार, 24 मई 2026 को शाम 7:30 बजे सोसायटी में एक विशेष आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने की मांग की।
निवासियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2026 के आदेश के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आया है। लोगों ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में सोसायटी में 200 से अधिक डॉग बाइट और कुत्तों के आक्रामक व्यवहार से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं।
बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर का माहौल
सोसायटी के लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों के डर की वजह से निवासी अपने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं। कई लोग शाम के समय पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर जाने में भी असहज महसूस करते हैं।
निवासियों के अनुसार, सोसायटी के पार्क, बेसमेंट, मुख्य प्रवेश द्वार और अन्य सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। कई बार ये कुत्ते राह चलते लोगों के पीछे दौड़ते हैं और आक्रामक व्यवहार करते हैं, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।

एनजीओ सदस्यों पर लगाए आरोप
कार्यक्रम के दौरान कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ एनजीओ सदस्य लगातार सोसायटी परिसर और आसपास इन कुत्तों को खाना खिला रहे हैं, जिससे उनकी संख्या और गतिविधियां बढ़ रही हैं। लोगों का कहना है कि बिना किसी तय व्यवस्था के फीडिंग किए जाने से समस्या और गंभीर हो गई है।
निवासियों ने यह भी कहा कि सुरक्षा के नाम पर अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
Nivasi Ekta Manch ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। मंच की ओर से जिला अधिकारी, पुलिस आयुक्त, स्थानीय विधायक, सांसद और मानव अधिकार आयोग सहित कई उच्च अधिकारियों को अपील भेजी गई है।
निवासियों द्वारा एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हस्ताक्षर कर अपनी चिंता जाहिर की। यह पत्र प्रशासन को सौंपा गया है, ताकि सोसायटी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द उचित कदम उठाए जा सकें।
सुरक्षा और संतुलन दोनों जरूरी
निवासियों का कहना है कि वे पशुओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उनका मानना है कि प्रशासन को ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा और संतुलन बना रहे।
