Uttarakhand: शराब के ठेकों को लेकर धामी सरकार ने नई आबकारी नीति में किए बड़े बदलाव
Uttarakhand News: उत्तराखंड के लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। आपको बता दें कि उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा फैसला ले लिया है। उत्तराखंड (Uttarakhand) की बीजेपी शासित धामी सरकार ने शराब नीति को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल (Pushkar Singh Dhami Cabinet) ने राज्य के लिए नई आबकारी नीति (New Excise Policy) को मंजूरी दे दी है। इसमें धार्मिक क्षेत्रों के पास स्थित शराब की दुकानों का लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान भी शामिल है।
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पुष्कर सिंह धामी सरकार (Pushkar Singh Dhami Government) के मुताबिक यह नीति धार्मिक क्षेत्रों के महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए बनाई गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि धार्मिक क्षेत्र की परिभाषा और उस क्षेत्र से शराब की बिक्री की अनुमति देने की दूरी जल्द ही जारी होने वाले सरकारी आदेश में साफ कर दी जाएगी।
धार्मिक क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला
अभी हर की पौड़ी और ऋषिकेश (Rishikesh) नगर पालिका परिषद के 7 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानें खोलने पर रोक है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब में शराब प्रतिबंधित है। उत्तराखंड की नई शराब नीति में यह भी कहा गया है कि अगर कोई दुकान अधिकतम खुदरा मूल्य से ज़्यादा पर शराब बेचती है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। एक सरकारी बयान में बताया गया है कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए डिपार्टमेंटल स्टोर पर भी एमआरपी नियम लागू होंगे।
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उत्तराखंड के निवासियों को मिलेगा लाइसेंस
इस मामले में एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दिया कि नई नीति के तहत मेट्रो शराब और उप-दुकानों की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। नीति में यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि थोक शराब लाइसेंस केवल उत्तराखंड के निवासियों को ही जारी किए जा सकेंगे, ताकि राज्य के भीतर आर्थिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारी ने जानकारी दी कि पहाड़ी क्षेत्रों में वाइनरी को बढ़ावा देने के लिए, स्थानीय रूप से उगाए गए फलों से वाइन बनाने वाली इकाइयों को अगले 15 सालों के लिए उत्पाद शुल्क में छूट मिलेगी। इसका उद्देश्य किसानों और बागवानी में लगे लोगों को लाभ पहुंचाना है।
स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे
नई आबकारी नीति (New Excise Policy) के तहत स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता और रोजगार के मौके प्रदान किए जाएंगे। मदिरा उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के निर्यात शुल्क में कटौती कर दी गई है। शराब की दुकानों का आवंटन दो सालों के लिए होगा और रिन्यूअल न होने की स्थिति में लॉटरी सिस्टम के जरिए दुकानें आवंटित की जाएंगी। आबकारी नीति के तहत सरकार द्वारा लिए गए, इन निर्णयों से शराब के नाम पर लूटखसोट पर लगाम लगने की भी उम्मीद है।
