UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो। इसी दिशा में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए डिजिटल व्यवस्था को तेजी से लागू किया जा रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार समर्थ पोर्टल से जुड़े 2.41 लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों का डेटा प्रेरणा पोर्टल से लिंक किया जा चुका है। अब जिला और ब्लॉक स्तर पर भी पंजीकरण अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।
डिजिटल व्यवस्था से आसान हुई प्रक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, पंजीकरण और शैक्षिक सहायता की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। इससे दिव्यांग बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना पहले की तुलना में काफी आसान और प्रभावी हो गया है। समर्थ और प्रेरणा पोर्टल के एकीकरण से छात्रवृत्ति, विशेष प्रशिक्षण, सहायक उपकरण और दूसरी सुविधाओं तक पहुंच सरल हुई है।
सरकार का मानना है कि तकनीक के सही इस्तेमाल से शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जा सकता है। अब बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति और शैक्षिक प्रगति की निगरानी भी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी।
कई जिलों में दिखा बेहतर परिणाम
प्रदेश के कई जिलों में इस अभियान के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। प्रयागराज में 6697, आजमगढ़ में 6322, लखीमपुर खीरी में 6182 और सीतापुर में 6121 दिव्यांग बच्चों का डेटा प्रेरणा पोर्टल से जोड़ा गया है। इसके अलावा गोंडा और हरदोई जैसे जिलों में भी अभियान तेजी से चल रहा है।
इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार की तकनीक आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है। सरकार का “कोई भी बच्चा शिक्षा से बाहर नहीं” का संकल्प धीरे-धीरे साकार होता नजर आ रहा है।
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
शासन स्तर से सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और समावेशी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दिव्यांग बच्चों का पंजीकरण अभियान मोड में पूरा कराया जाए। सरकार का साफ कहना है कि प्रदेश का कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से दूर नहीं रहना चाहिए।
पहले दिव्यांग बच्चों के आंकड़ों और उनकी शिक्षा से जुड़ी जानकारी को लेकर एक समान व्यवस्था नहीं थी। अब शासन के पास वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध हो रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे पात्र बच्चों तक पहुंच सकेगा।
तकनीक आधारित शिक्षा मॉडल को मिल रही मजबूती
योगी सरकार पहले से ही स्मार्ट क्लास, मिशन प्रेरणा, निपुण भारत मिशन और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। अब समावेशी शिक्षा में यह नई पहल उसी बड़े विजन का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार शिक्षा को केवल अधिकार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर का माध्यम मान रही है।
दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।
