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UP News: महाकुंभ-25 में यूपी पुलिस का कमांड सेंटर बना दुनिया के लिए मिसाल मिला SKOCH Gold Award 2025

उत्तरप्रदेश राजनीति
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UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित महाकुंभ-25 न केवल आस्था का सबसे बड़ा आयोजन बना, बल्कि आधुनिक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था का भी उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। प्रयागराज में 45 दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इतनी विशाल भीड़ को सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संभालना अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी।

इस चुनौती को सफलतापूर्वक संभालने में यूपी पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) ने अहम भूमिका निभाई, जिसे अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।

आईसीसीसी बना महाकुंभ का नर्व सेंटर

महाकुंभ-25 के संचालन का केंद्र बिंदु यूपी पुलिस का इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर रहा। इसे 24×7 सक्रिय “नर्व सेंटर” के रूप में विकसित किया गया था। यहां से भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एक ही स्क्रीन पर किया गया।

हजारों हेक्टेयर में फैले महाकुंभ क्षेत्र और मौनी अमावस्या जैसे विशेष स्नान पर्वों पर उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ को नियंत्रित करने में यह सेंटर बेहद कारगर साबित हुआ।

12 महीने पहले शुरू हुई थी तैयारी

महाकुंभ-25 की तैयारी एक सामान्य आयोजन की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत सिस्टम इंजीनियरिंग मॉडल के तहत की गई। आयोजन से करीब एक साल पहले ही योजना बनाना शुरू कर दिया गया था।

भीड़ के दबाव, आपात स्थितियों और संभावित संकटों से निपटने के लिए टेबल-टॉप एक्सरसाइज, सीनारियो टेस्टिंग और डिजिटल सिमुलेशन किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ संदेश था कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

हाईटेक तकनीक से लैस था कमांड सेंटर

आईसीसीसी में 2,750 से अधिक एआई आधारित कैमरे लगाए गए थे। इसके साथ ही चार ऑपरेशनल यूनिट्स, 400 से ज्यादा प्रशिक्षित कर्मी और 1920 हेल्पलाइन कॉल सेंटर कार्यरत रहा।

वाहनों की निगरानी के लिए ANPR तकनीक, जैम-प्रूफ वायरलेस नेटवर्क, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड और 11 भाषाओं में काम करने वाला एआई चैटबॉट “कुंभ सह’AI’यक” श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैनात किया गया था।

60 लाख से अधिक साइबर हमलों को किया नाकाम

महाकुंभ-25 केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि डिजिटल रूप से भी बेहद बड़ा आयोजन था। इसी कारण यह साइबर हमलावरों के निशाने पर भी रहा। 45 दिनों के दौरान 25 से अधिक देशों से किए गए 60 लाख से ज्यादा संदिग्ध और खतरनाक साइबर हमलों को नाकाम किया गया।

इन हमलों में DDoS, रैनसमवेयर, फिशिंग, वेबसाइट अटैक और डेटा चोरी जैसी कोशिशें शामिल थीं। यूपी पुलिस की साइबर टीम ने केंद्रीय एजेंसियों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से इन सभी हमलों को समय रहते रोक दिया।

डिजिटल कुंभ के साथ डिजिटल सुरक्षा

आईपीएस अधिकारी भानु भास्कर के अनुसार, 56 विशेष “साइबर वॉरियर्स” लगातार डिजिटल निगरानी में लगे रहे। साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा और जन-विश्वास से जोड़ा गया।

IIT कानपुर, IIIT प्रयागराज और STQC जैसी संस्थाओं ने तकनीकी सहयोग और सुरक्षा परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक मंच, कई विभागों का तालमेल

आईसीसीसी की सबसे बड़ी ताकत तकनीक के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल रहा। पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, आपदा प्रबंधन और रेलवे जैसे विभाग एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहे।

इससे किसी भी स्थिति में त्वरित निर्णय और कार्रवाई संभव हो सकी।

SKOCH Gold Award से मिला राष्ट्रीय सम्मान

महाकुंभ-25 के इस हाईटेक आईसीसीसी मॉडल को 105वें SKOCH Summit में SKOCH Gold Award 2025 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार यूपी पुलिस की नागरिक-केंद्रित और तकनीक आधारित कार्यशैली को राष्ट्रीय मान्यता देता है।

यह अवॉर्ड तत्कालीन एडीजी प्रयागराज जोन भानु भास्कर को प्रदान किया गया, जिसे एसपी आईसीसीसी अमित कुमार ने ग्रहण किया।