Driving License: उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने की प्रक्रिया में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद परिवहन विभाग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा सख्त बनाने की तैयारी में जुट गया है।
सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षित और ट्रैफिक नियमों की जानकारी रखने वाले लोगों को ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
पासपोर्ट जैसी होगी सत्यापन प्रक्रिया
हाल ही में सड़क सुरक्षा को लेकर हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को पासपोर्ट की तर्ज पर अधिक व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।
पासपोर्ट बनवाने में आवेदन, बायोमेट्रिक सत्यापन और पुलिस वेरिफिकेशन जैसी कई चरणों की प्रक्रिया होती है। इसी तरह ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली को भी अधिक मजबूत और तकनीक आधारित बनाने पर काम किया जा रहा है।
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ड्राइविंग लाइसेंस के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा या नहीं। परिवहन विभाग इस संबंध में कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर रहा है।
मौजूदा प्रक्रिया में क्या होगा बदलाव?
वर्तमान व्यवस्था में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए परिवहन कार्यालय जाना पड़ता है।
लर्निंग लाइसेंस मिलने के बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट देना अनिवार्य होता है। संबंधित अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर स्थायी लाइसेंस जारी किया जाता है।
अब सरकार इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
निजी सेंटरों पर होगा ड्राइविंग टेस्ट
सरकार ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था में भी बदलाव कर रही है।
अब तक अधिकांश आवेदकों को परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ता था, लेकिन जल्द ही यह सुविधा निजी अधिकृत टेस्टिंग सेंटरों पर उपलब्ध कराई जाएगी।
इसका उद्देश्य टेस्ट प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाना है।
सड़क दुर्घटनाएं कम करने पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण वाहन चालकों की लापरवाही और पर्याप्त प्रशिक्षण का अभाव है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल उन्हीं लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा जो वाहन चलाने में सक्षम होंगे और ट्रैफिक नियमों की सही जानकारी रखते होंगे।
मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों का किया जा रहा अध्ययन
परिवहन विभाग यह भी देख रहा है कि मौजूदा मोटर व्हीकल एक्ट में किन प्रावधानों के तहत लाइसेंस प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सकता है।
यदि कानून में संशोधन की आवश्यकता नहीं हुई, तो वर्तमान व्यवस्था में ही तकनीकी सुधार कर पासपोर्ट जैसी पारदर्शी प्रणाली लागू की जा सकती है।
संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी बदलाव
इसी बीच उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि जून 2026 का वेतन जुलाई में केवल आउटसोर्स पोर्टल के माध्यम से ही जारी किया जाएगा।
हालांकि, संविदा कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि पोर्टल पर दर्ज कर्मचारियों और वास्तविक कार्यरत कर्मचारियों के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया, तो कई कर्मचारियों का वेतन रुक सकता है या उनकी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
