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Ram Mandir पर आज होगा भव्य धर्मध्वजारोहण, जानिए क्यों खास है 44 मिनट का शुभ मुहूर्त?

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Ram Mandir: अयोध्या में आज वह शुभ घड़ी आ गई है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भव्य धर्म ध्वजारोहण होगा।

Ram Mandir: अयोध्या में आज वह शुभ घड़ी आ गई है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Shri Ram Janmabhoomi Temple) के शिखर पर भव्य धर्म ध्वजारोहण (Religious Flag Hoisting) होगा। मंदिर का संपूर्ण निर्माण पूरा हो चुका है और आज केसरिया रंग (Saffron Colour) का विशाल ध्वज मंदिर पर लहराएगा। यह ध्वजारोहण राम मंदिर के वैभव और गौरव का प्रतीक माना जा रहा है। पूरी अयोध्या नगरी इस पावन अवसर के लिए भव्य रूप से सजाई गई है। रंग-बिरंगी रोशनी से प्रभु राम की नगरी जगमग कर रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फहराएंगे ध्वज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज सुबह करीब 10 बजे अयोध्या पहुंचेंगे। वे सबसे पहले सप्तमंदिर और फिर शेषावतार मंदिर में दर्शन करेंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर दोपहर ठीक 12 बजे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर स्वयं भगवा ध्वज फहराएंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और राम मंदिर ट्रस्ट ने बड़े स्तर पर लोगों को आमंत्रित किया है।

44 मिनट का खास अभिजीत मुहूर्त

ज्योतिषियों के अनुसार ध्वजारोहण अभिजीत मुहूर्त में होगा, जो आज सुबह 11:45 से दोपहर 12:29 तक रहेगा। यह कुल 44 मिनट का शुभ मुहूर्त है। मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीराम का जन्म भी इसी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, इसलिए मंदिर पर ध्वज फहराने के लिए यही समय चुना गया है।

25 नवंबर ही क्यों चुना गया?

आज मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी है, जिसे विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है। त्रेता युग में भगवान राम और माता जानकी का विवाह इसी तिथि को हुआ था। हिंदू पंचांग में विवाह पंचमी को सर्वाधिक शुभ विवाह तिथि माना जाता है। इसलिए इस पावन तिथि को ध्वजारोहण के लिए चुना गया।

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यह ध्वज कितना खास है?

राम मंदिर पर फहराया जाने वाला ध्वज केसरिया रंग का है।

लंबाई: 22 फीट

चौड़ाई: 11 फीट

ध्वजदंड: 42 फीट

शिखर की ऊंचाई जहां ध्वज लगेगा: 161 फीट

ध्वज पर तीन पवित्र चिह्न अंकित हैं – सूर्य, ॐ और कोविदार वृक्ष। सनातन परंपरा में केसरिया रंग त्याग, बलिदान, वीरता, भक्ति, ज्ञान और सत्य की विजय का प्रतीक है। रघुवंश के राजाओं का यही राजचिह्न रंग रहा है।

ध्वज पर अंकित चिह्नों का महत्व

कोविदार वृक्ष– रघुवंश की कुल परंपरा का प्रतीक। वाल्मीकि रामायण में भरत के ध्वज पर भी इसी वृक्ष का वर्णन है।

ॐ- सभी मंत्रों का प्राण, संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व।

सूर्य- विजय और तेज का प्रतीक।

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हिंदू शास्त्रों में ध्वज का महत्व

गरुड़ पुराण के अनुसार मंदिर पर फहराया गया ध्वज देवता की उपस्थिति का संकेत देता है। जिस दिशा में ध्वज लहराता है, वह पूरा क्षेत्र पवित्र हो जाता है। शिखर पर ध्वज देवता की महिमा, शक्ति और संरक्षण का प्रतीक है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में भी ध्वज-पताका का बार-बार उल्लेख मिलता है।

आज जब रघुकुल तिलक श्रीराम के मंदिर शिखर पर भगवा ध्वज लहराएगा, तो यह संदेश जाएगा कि अयोध्या में रामराज्य की पुनर्स्थापना हो चुकी है। यह त्रेता के उत्सव का कलियुग में दिव्य स्वरूप है।