Tahavvur Rana, the mastermind of 26/11 Mumbai attack, should be hanged": Commando Surendra Singh

26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड “तहव्वुर राणा को फांसी की सजा मिले”: कमांडो सुरेंद्र सिंह

दिल्ली दिल्ली NCR
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वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र प्रताप सिंह के साथ ज्योति शिंदे की रिपोर्ट

नई दिल्ली: 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का एक अहम चेहरा और संदिग्ध साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा(Tahawwur Hussain Rana) को लेकर देश में गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है। हाल ही में स्पेशल फोर्स के पूर्व कमांडो सुरेंद्र सिंह Commando Surender Singh) ने कड़ा बयान देते हुए मांग की है कि तहव्वुर राणा को भारत लाकर फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

कमांडो सुरेंद्र सिंह, जो खुद 26/11 के दौरान मुंबई ऑपरेशन में शामिल थे, ने कहा,

“जिसने निर्दोषों की जान ली, जो देश के खिलाफ साजिश में शामिल थे, उन्हें जीने का कोई हक नहीं है। तहव्वुर राणा को फांसी होनी चाहिए। यह सिर्फ न्याय नहीं, बल्कि उन शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी।” आपको बता दें 26/11 मुंबई होटल ताज आतंकवादी हमले में अपनी जान पर खेल कर कमांडो सुरेंद्र सिंह ने जख्मी हालत में दो आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा और निर्दोष 627 लोगों को जिंदा होटल से बाहर निकाल कर बचाया था ! कमांडो सुरेंद्र सिंह को कई गोलियां लगी थी, इसके बाद भी देश के जांबाज ने हार नहीं मानी और 2 आतंकियों को ढेर किया। आतंकी कसाब को पकड़वाने में भी कमांडो सुरेंद्र सिंह की अहम भूमिका रही।

कमांडो सुरेंद्र सिंह ने कहा कि – “ 26/11 हमले के शुत्र धार (मास्टरमाइंड) तहव्वुर हुसैन राणा राणा को अमेरिका से हिंदुस्तान की सर जमीन पर लाकर हिंदुस्तान के न्यायालय के सामने पेश करना, ये प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कारण संभव हो पाया है। अब पूरे मामले की जांच होगी और बहुत सारे दोषियों का खुलासा होगा ! इससे आतंकवाद पर गहरी चोट होगी साथ ही पाकिस्तान के मुंह पर बड़ा तमाचा भी होगा !

 बढ़ते दबाव के बीच, न्याय की मांग

तहव्वुर राणा पर 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमलों का मुख्य सूत्रधार माना गया है। कसाब और उसके साथी आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके 160 से ज्यादा निर्दोषों की जान ली थी।

 शहीदों को न्याय दिलाने की लड़ाई

कमांडो सुरेंद्र सिंह जैसे जांबाजों की अपील देश की उस भावनाओं को आवाज देती है, जो आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक कार्यवाही चाहती है। उन्होंने कहा, “अगर हम ऐसे गुनहगारों को सजा नहीं देंगे, तो यह उन शहीदों का अपमान होगा जिन्होंने देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया।”

 देश की जनता भी साथ

सोशल मीडिया पर भी तहव्वुर राणा के खिलाफ फांसी की मांग ट्रेंड कर रही है। कई नागरिकों और पूर्व अधिकारियों का मानना है कि भारत सरकार को इस केस में जल्द और सख्त कदम उठाना चाहिए।

तहव्वुर राणा: 26/11 मुंबई आतंकी हमले में एक छिपा हुआ किरदार

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भीषण आतंकी हमले ने भारत को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 166 लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए। इस हमले के पीछे कई चेहरे थे, जिनमें से एक था तहव्वुर हुसैन राणा — एक पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक, जिसे ‘डॉक्टर डेथ’ के नाम से भी जाना जाता है।​

तहव्वुर राणा कौन है?

तहव्वुर राणा ने पाकिस्तान की सेना में डॉक्टर के रूप में सेवा दी थी। बाद में वह कनाडा और अमेरिका में व्यवसायी बन गया। उसका स्कूली दोस्त डेविड कोलमैन हेडली (पूर्व में दाऊद गिलानी) था, जो 26/11 हमले का मुख्य साजिशकर्ता था। राणा और हेडली ने मिलकर इस हमले की योजना बनाई थी।​

26/11 हमले में राणा की भूमिका

  • साजिश में सहभागिता: राणा ने हेडली को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारतीय टूरिस्ट वीजा दिलाने में मदद की, जिससे हेडली ने मुंबई में विभिन्न स्थानों की रेकी की। ​
  • मुंबई में उपस्थिति: हमले से कुछ दिन पहले, राणा मुंबई के पवई स्थित एक फाइव स्टार होटल में 11 से 21 नवंबर 2008 तक ठहरा था। ​
  • लश्कर-ए-तैयबा और ISI से संबंध: चार्जशीट के अनुसार, राणा ने लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के साथ मिलकर हमले की योजना बनाई थी।

गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण

2009 में अमेरिकी एजेंसी FBI ने राणा को शिकागो से गिरफ्तार किया। हालांकि, उसे 26/11 हमले के आरोपों से बरी कर दिया गया, लेकिन डेनमार्क में एक अखबार के कार्यालय पर हमले की साजिश के लिए उसे 14 साल की सजा हुई। भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की, जिसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2025 में मंजूरी दे दी।

भारत के लिए क्या मायने रखता है राणा का प्रत्यर्पण?

राणा का भारत प्रत्यर्पण न केवल न्याय की दिशा में एक कदम है, बल्कि इससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका को उजागर करने में भी मदद मिलेगी। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि राणा से पूछताछ के जरिए 26/11 हमले से जुड़े कई अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा उठेगा। ​

तहव्वुर राणा की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि राणा से पूछताछ के दौरान क्या नए खुलासे होते हैं और कैसे यह भारत की न्याय प्रणाली को मजबूत करता है।