Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने राज्य का प्रमुख और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण खेजड़ी (Khejri) पेड़ों की कटाई पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। राजस्व विभाग की ओर से सभी जिलों के कलेक्टर और आयुक्तों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि खेजड़ी के पेड़ को कोई भी व्यक्ति या संस्था कानूनी रूप से नहीं काट पाएगी, जब तक कि जल्द ही प्रस्तावित विशेष ‘ट्री प्रोटेक्शन कानून’ लागू न हो जाए। यह निर्णय लंबे समय तक चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन (Khejri Bachao Andolan) के बाद लिया गया है, जिसमें पर्यावरण प्रेमी, संत और विशेषकर बिश्नोई समुदाय ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और बिश्नोई समुदाय की मांग
खेजड़ी वृक्ष राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण में अहम योगदान देता है, इसलिए इसके कटने को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरणवादियों में गहरा ऐतराज रहा है। आंदोलन नवंबर से भी पहले से चल रहा था, लेकिन जब पश्चिमी राजस्थान में कई खेजड़ी पेड़ों को विभिन्न परियोजनाओं के लिए काटा जा रहा था, तो लोगों का गुस्सा और समर्थन एकजुट होकर आंदोलन तेज हुआ।
मुख्य रूप से बिश्नोई समुदाय के नेतृत्व में यह आंदोलन बीकानेर में शुरू हुआ था, जहां श्रद्धालु और पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से खेजड़ी पेड़ों की रक्षा के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं के साथ जुटे रहे। आंदोलन में महिलाएं, बुजुर्ग, संत और युवा सभी ने साथ मिलकर अपनी आवाज़ उठाई। कई पर्यावरण संगठनों ने भी इसका समर्थन किया, जिससे दबाव और बढ़ा।
सरकार का आदेश और आंदोलन की समाप्ति
राजस्थान सरकार ने लंबे संवाद और आयोजनों के बाद खेजड़ी कटाई पर रोक लगाने का आदेश सभी जिलों में भेज दिया है। यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक विशेष ‘ट्री प्रोटेक्शन कानून’ विधानसभा में पारित नहीं हो जाता। राजस्व विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया है कि किसी भी हालत में खेजड़ी के पेड़ का अवैध कटान न हो। इस घोषणा के बाद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन और महापड़ाव स्थगित कर दिया है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कानून ढीला या जनता की भावना के अनुरूप नहीं हुआ तो आंदोलन फिर शुरू हो सकता है।
खेजड़ी का पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व
खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और यह थार रेगिस्तान जैसे कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवन बनाए रखने में मदद करता है। यह न केवल मिट्टी को बांधता है, बल्कि पशुपालन और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी सशक्त बनाता है। इसके अलावा, बिश्नोई समुदाय की ऐतिहासिक कथाओं में खेजड़ी के लिए एक विशेष स्थान है — 1730 में खेजड़ली आंदोलन के समय अमृता देवी और अन्य 363 लोगों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था, जिससे आज भी इस वृक्ष संरक्षण का प्रतीक बना हुआ है।
आगे क्या होगा
सरकार ने यह भी कहा है कि नया कानून जल्दी से जल्दी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा ताकि खेजड़ी संरक्षण को वैधानिक रक्षा मिल सके। इस कानून में खेजड़ी कटाई पर सख्त दंड और संरक्षण के स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जाएंगे। स्थानीय समुदायों और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ मिलकर पक्षियों, वन्यजीवों और मिट्टी के संरक्षण के लिए एक मजबूत संरक्षण फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है।
