Rajasthan News: सीएम भजनलाल शर्मा ने घटाया अपना काफिला, दिया सादगी का संदेश

राजस्थान
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Rajasthan News: Rajasthan के मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma ने ईंधन बचाने और सरकारी खर्च कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री के काफिले में केवल 5 वाहन दिखाई दिए, जबकि पहले करीब एक दर्जन गाड़ियां साथ चलती थीं। सरकार का कहना है कि यह फैसला सादगी और संसाधनों के सही उपयोग का संदेश देने के लिए लिया गया है।

पीएम मोदी की अपील का दिखा असर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का यह फैसला प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और मितव्ययिता अपनाने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और बढ़ती ईंधन खपत को देखते हुए लोगों से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने, कारपूलिंग अपनाने और अनावश्यक यात्रा कम करने की अपील की थी। इसी दिशा में राजस्थान सरकार ने भी कदम बढ़ाया है।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी निर्देश

मुख्यमंत्री ने केवल अपने काफिले तक ही यह फैसला सीमित नहीं रखा। उन्होंने मुख्य सचिव सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी काफिले में कम से कम वाहन रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि प्रशासनिक स्तर पर भी ईंधन की बचत हो और अनावश्यक खर्च कम किया जाए। अधिकारियों से कहा गया है कि जहां जरूरी न हो वहां अतिरिक्त वाहनों का उपयोग न करें।

जनता को दिया जिम्मेदारी का संदेश

राजस्थान सरकार का मानना है कि इस कदम से आम लोगों में भी संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। सरकार चाहती है कि लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करें और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन या साझा यात्रा को अपनाएं। इससे न केवल पेट्रोल और डीजल की बचत होगी बल्कि प्रदूषण भी कम होगा। मुख्यमंत्री का यह फैसला आम जनता के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

कई राज्यों में शुरू हुई ऐसी पहल

प्रधानमंत्री मोदी के फैसले के बाद कई राज्यों में भी ऐसी पहल देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान के साथ-साथ मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी नेताओं ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करनी शुरू कर दी है। इसे सरकारी सादगी और ईंधन बचत की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।