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Punjab: पंजाब में बार-बार क्यों बनते हैं बाढ़ के हालात, मान सरकार कैसे दे रही है रेस्क्यू को अंजाम?

पंजाब राजनीति
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Punjab: मानसून के दौरान उत्तर भारत में हुई भारी बारिश ने पंजाब में तबाही मचा दी।

Punjab News: मानसून के मौसम में भारी बारिश (Heavy Rain) उत्तर भारत में आम है, लेकिन इस हफ्ते पंजाब (Punjab) में हुई असाधारण वर्षा ने राज्य को गंभीर बाढ़ की चपेट में डाल दिया। उफनती नदियां किनारों को तोड़कर गांवों और खेतों में घुस गईं, जिससे पंजाब हाल की सबसे भयावह बाढ़ से जूझ रहा है। मान सरकार (Mann Government) ने तुरंत सभी 23 जिलों को बाढ़ प्रभावित घोषित करते हुए राहत कार्यों को तेज कर दिया।

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आपको बता दें कि जारी आंकड़ों के मुताबिक, 1,902 गांव जलमग्न हो गए, 3.8 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, 11.7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हुई, और कम से कम 43 लोगों की मौत हुई। लाखों लोग बिजली और स्वच्छ पानी से वंचित हैं, जबकि कई गांवों में सड़ते जानवरों के शवों से दुर्गंध फैली हुई है। मान सरकार ने इस संकट को ‘1988 के बाद की सबसे भयानक बाढ़’ बताते हुए पूरे राज्य को एकजुट राहत अभियान में लगा दिया है।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले

सबसे अधिक प्रभावित जिला गुरदासपुर (Gurdaspur) रहा, जहां 329 गांव और 1.45 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए। यहां करीब 40 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि डूब गई। इसके अलावा पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, तरनतारन और फाजिल्का जैसे जिलों में भी हालात गंभीर रहे।

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पंजाब की ताकत, लेकिन चुनौती भी

पंजाब से होकर बहने वाली तीन बारहमासी नदियां रावी, ब्यास और सतलुज पंजाब राज्य को धरती का सबसे उपजाऊ इलाका बनाती हैं। रावी पठानकोट और गुरदासपुर से गुजरती है, ब्यास होशियारपुर, गुरदासपुर, कपूरथला, अमृतसर, तरनतारन और हरिके से होकर बहती है, जबकि सतलुज नंगल, रोपड़, नवांशहर, जालंधर, लुधियाना, मोगा, फिरोजपुर और तरनतारन को पार करती है। मौसमी नदी घग्गर, छोटी सहायक नदियां और पहाड़ी धाराएं (चोई) भी योगदान देती हैं। ये नदियां जलोढ़ मिट्टी लाकर पंजाब को ‘अन्न का कटोरा’ बनाती हैं, जहां देश के 20 प्रतिशत गेहूं और 12 प्रतिशत चावल का उत्पादन केवल 1.5 प्रतिशत क्षेत्रफल से होता है।

इसकी कीमत भी चुकाता है यह राज्य

पंजाब को इस उर्वरता की कीमत चुकानी पड़ती है, क्योंकि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मानसून की बारिश नदियों को उफान पर ला देती है। धुस्सी बांधों (मिट्टी के तटबंधों) की विस्तृत व्यवस्था बाढ़ से बचाव की पहली पंक्ति है, लेकिन भारी वर्षा अक्सर इन्हें चुनौती देती है। इस साल भी 1955, 1988, 1993, 2019 और 2023 की तरह ऐसा हुआ। 10 अगस्त से हिमाचल में भारी बारिश से व्यास नदी का प्रवाह 50-55 हजार क्यूसेक हो गया, जिससे कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का और होशियारपुर प्रभावित हुए।

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लगातार बारिश से बढ़ी चुनौतियां

अगस्त के मध्य से अंत तक हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बारिश से रावी नदी उफान पर आई। 26 अगस्त को पठानकोट के माधोपुर बैराज के दो गेट टूटने से पानी का बहाव 2 लाख क्यूसेक से अधिक हो गया, जिससे पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर में बाढ़ आई। पंजाब में लगातार बारिश ने सतलुज के अधिकांश तटबंध सुरक्षित रखे, लेकिन मालवा क्षेत्र के लुधियाना, जालंधर, रोपड़, नवांशहर और मोगा में जलभराव हो गया। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार तक पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में 45 प्रतिशत अतिरिक्त वर्षा दर्ज हुई।

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1,700 अधिकारियों की तैनाती

मान सरकार ने रेस्क्यू को अंजाम देने के लिए 1,700 गजेटेड अधिकारियों को तैनात किया, जिससे प्रत्येक प्रभावित गांव में एक अधिकारी निगरानी करे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीएसएफ और स्थानीय एनजीओ के संयुक्त प्रयासों से गुरदासपुर में हेलीकॉप्टर से 27 लोगों को बचाया गया, जबकि कुल 11,330 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।