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Punjab News: ग्राम पंचायत की सड़क पर कब्जे के मामले में कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा को झटका, हाईकोर्ट ने लगाया 6 लाख का जुर्माना: बलतेज पन्नू

पंजाब
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Punjab News: कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। ग्राम पंचायत की सार्वजनिक सड़क और रास्ते पर कथित कब्जे के मामले में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए उन पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने कांग्रेस विधायक पर तीखा हमला बोला है।

आप पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हाईकोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा खुद दूसरों पर आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन अब वे खुद “लैंड माफिया” के रूप में सामने आए हैं।

ग्राम पंचायत के रास्ते पर लगाया गया था गेट

बलतेज पन्नू ने बताया कि मामला ग्राम पंचायत रामगढ़ की सार्वजनिक गली और रास्ते से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि सुखपाल सिंह खैरा और कुलबीर सिंह खैरा ने सार्वजनिक रास्ते पर अवैध रूप से गेट लगाकर गांव के लोगों के आने-जाने में रुकावट पैदा की थी।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच की, जिसमें ग्राम पंचायत की मेजरमेंट बुक, जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट, स्वामित्व रिकॉर्ड और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए यह साबित हुआ कि विवादित जमीन सार्वजनिक रास्ते का हिस्सा थी।

कोर्ट ने कहा- यह अवैध कब्जा

पन्नू के अनुसार हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि सार्वजनिक रास्ते पर गेट लगाना गैर-कानूनी कब्जा और अवरोध है। इससे गांव के लोगों के साथ-साथ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसी इमरजेंसी सेवाओं के आने-जाने में भी दिक्कत हो सकती थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रशासन कब्जा हटाने पहुंचा तो सुखपाल खैरा ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई में बाधा डालने की कोशिश की।

हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

आप नेता ने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका पूरी तरह खारिज कर दी और उन पर 6 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि याचिका को “बहुत चालाकी से” तैयार किया गया था ताकि इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन जैसा दिखाया जा सके, जबकि असली मामला सार्वजनिक जमीन पर कब्जे का था।

“झूठ और राजनीति की पोल खुली”

बलतेज पन्नू ने कहा कि सुखपाल सिंह खैरा की आदत रही है कि वे बिना तथ्यों के राजनीतिक विरोधियों पर आरोप लगाते हैं और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को गुमराह करते हैं। लेकिन हाईकोर्ट के इस फैसले ने उनके सभी दावों की पोल खोल दी है।

उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला यह साबित करता है कि सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वाले खुद दूसरों पर आरोप लगाते रहे हैं। अब हाईकोर्ट के आदेश ने पूरे मामले को साफ कर दिया है।