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Punjab News: Barinder Kumar Goyal ने पंजाब में CRMS माइनिंग साइटों की शुरुआत की

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Punjab News: पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री Barinder Kumar Goyal ने राज्य में क्रशर-ओनर माइनिंग साइटों (CRMS) की शुरुआत की है। इसकी शुरुआत पठानकोट जिले से की गई। सरकार का कहना है कि इस कदम से रेत और अन्य खनिज पदार्थों की कानूनी आपूर्ति बढ़ेगी और अवैध खनन पर रोक लगेगी।

इस मौके पर दो नई माइनिंग साइटों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ये साइटें 4.46 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हैं।

31 मार्च 2026 तक 44 साइटें होंगी चालू

मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक 44 स्वीकृत क्रशर माइनिंग साइटें शुरू हो जाएंगी। ये साइटें कुल 305.59 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती हैं।

इसके अलावा, 14 साइटों को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है। बाकी 119 साइटों को भी इसी साल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही सभी साइटें चालू हो जाएं।

सस्ती दरों पर रेत उपलब्ध कराने का वादा

Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि लोगों को किफायती दरों पर रेत और खनिज उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।

क्रशर-ओनर और लैंड-ओनर माइनिंग साइटों के शुरू होने से बाजार में रेत-बजरी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतें स्थिर रहेंगी। इससे आम लोगों और निर्माण कार्यों को राहत मिलेगी।

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अवैध खनन पर जीरो-टॉलरेंस नीति

मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने साफ कहा कि सरकार की अवैध खनन के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति गैर-कानूनी खनन में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कानूनी खनन बढ़ने से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।

नई नीति से बढ़ेगा राजस्व और रोजगार

सरकार के अनुसार, इस नई व्यवस्था से सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी। साथ ही खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और नियमितता आएगी।

कानूनी स्वीकृति, पर्यावरणीय मंजूरी और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इससे न केवल बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी, बल्कि पंजाब में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

क्या है क्रशर-ओनर माइनिंग साइट मॉडल?

इस मॉडल के तहत पंजीकृत क्रशर मालिक अपनी जमीन, लीज पर ली गई जमीन या पावर ऑफ अटॉर्नी से मिली जमीन पर, स्वीकृत माइनिंग योजना के अनुसार खनन कर सकते हैं।

इसी तरह, लैंड-ओनर माइनिंग साइट में जमीन का मालिक सभी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरी के बाद अपनी जमीन पर खनन कर सकता है।

सरकार का कहना है कि यह कदम खनन क्षेत्र को व्यवस्थित, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा।