Punjab News: बजट 2026–27 को पंजाब कैबिनेट की मंजूरी, 8 मार्च को पेश करेंगे वित्त मंत्री

पंजाब
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Punjab News: Bhagwant Mann की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने राज्य के वित्तीय मामलों से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2026–27 के बजट अनुमानों को स्वीकृति दे दी गई है। अब राज्य के वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema 8 मार्च को पंजाब विधानसभा में यह बजट पेश करेंगे।

इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने वर्ष 2025–26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों और वर्ष 2024–25 की ऑडिट रिपोर्टों को भी विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और स्पष्टता बनी रहेगी।

कैबिनेट बैठक में बजट अनुमानों को मंजूरी

पंजाब विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में वर्ष 2026–27 के बजट अनुमानों को मंजूरी दी गई, जिससे अब इसे आधिकारिक रूप से विधानसभा में पेश किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि आने वाला बजट राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान देगा।

8 मार्च को पेश होगा पंजाब का बजट

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा 8 मार्च को विधानसभा में वर्ष 2026–27 का बजट पेश करेंगे। यह बजट राज्य की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

इस बजट में सरकार की प्राथमिकताएं, विभिन्न विभागों के लिए आवंटित धनराशि और विकास योजनाओं की रूपरेखा सामने आएगी। आमतौर पर बजट के जरिए सरकार आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी आर्थिक रणनीति और योजनाओं को स्पष्ट करती है।

अनुदानों की अनुपूरक मांगों को भी स्वीकृति

मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों को भी मंजूरी दे दी है। इसका मतलब है कि जिन योजनाओं या विभागों को अतिरिक्त धन की जरूरत है, उनके लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि यह कदम विभिन्न विकास योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जरूरी है।

सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट भी होगी पेश

कैबिनेट ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी Comptroller and Auditor General of India की ऑडिट रिपोर्टों को भी विधानसभा में पेश करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही पंजाब सरकार के वर्ष 2024–25 के वित्तीय और विनियोजन लेख भी सदन के पटल पर रखे जाएंगे।

इन रिपोर्टों के जरिए सरकार के खर्च और वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा होती है। इससे यह पता चलता है कि सरकारी धन का उपयोग किस तरह किया गया और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

सरकार का कहना है कि इन सभी प्रक्रियाओं का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना है।