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PNG: PNG का इस्तेमाल करने वालों को झटका, जानिये अब से कितना ज़्यादा आएगा बिल

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PNG: घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अब महंगी हो गई है। राजधानी New Delhi और आसपास के क्षेत्रों में गैस सप्लाई करने वाली कंपनी Indraprastha Gas Limited (IGL) ने PNG की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस फैसले के बाद लाखों उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में इजाफा होने की संभावना है, खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजाना खाना बनाने के लिए PNG का उपयोग करते हैं। बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

कितनी बढ़ी गैस की कीमत

कंपनी द्वारा जारी नई दरों के अनुसार, दिल्ली में PNG की कीमत में लगभग ₹1.70 प्रति SCM की बढ़ोतरी की गई है। अब नई कीमत करीब ₹49.59 प्रति SCM हो गई है, जबकि पहले यह ₹47.89 प्रति SCM थी। यह नई दरें अप्रैल 2026 की शुरुआत से लागू कर दी गई हैं, जिसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के गैस बिल पर पड़ेगा। यदि किसी परिवार की मासिक खपत अधिक है, तो उनके कुल बिल में पहले की तुलना में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

NCR के अन्य शहरों में भी लागू हुई नई दरें

दिल्ली के अलावा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के अन्य शहरों में भी PNG की कीमतों में बदलाव किया गया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में भी गैस की कीमतों में लगभग ₹1 से ₹1.70 प्रति SCM तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पूरे NCR क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवार और छोटे व्यवसाय, जैसे रेस्टोरेंट और ढाबे, इस बढ़ोतरी से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

कीमत बढ़ने की मुख्य वजह क्या है

विशेषज्ञों का मानना है कि PNG की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। इसके अलावा गैस के आयात, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण से जुड़ी लागत में वृद्धि भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संसाधनों की मांग बढ़ने और आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण कंपनियों को लागत बढ़ानी पड़ रही है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

आने वाले समय में और बढ़ सकती हैं कीमतें

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो भविष्य में PNG और CNG की दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अपने खर्च की बेहतर योजना बनाने और ऊर्जा के उपयोग में बचत करने की सलाह दी जा रही है। सरकार और संबंधित कंपनियां भी समय-समय पर कीमतों की समीक्षा करती रहती हैं, ताकि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।