Noida News: मां के संघर्ष से जन्मा खास किताबों का संसार

नोएडा
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Noida News: कभी-कभी जिंदगी की कठिन परिस्थितियां ही इंसान को कुछ नया करने की प्रेरणा देती हैं। नोएडा में रहने वाली Neeti Shukla की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी ऑटिज़्म से प्रभावित है, तब उन्होंने हार मानने के बजाय एक नई दिशा में कदम बढ़ाया।

एक मां के रूप में उन्होंने अपनी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उन्हें एक बड़ी कमी का एहसास हुआ।

ऑटिज़्म को समझना और उससे जुड़ी चुनौतियां

ऑटिज़्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे सामान्य तरीके से बातचीत और व्यवहार नहीं कर पाते। Neeti Shukla की बेटी अविका भी शुरुआत में बुलाने पर प्रतिक्रिया नहीं देती थी, आंखों से संपर्क कम करती थी और अक्सर चिड़चिड़ी रहती थी।

जब अविका लगभग दो साल की थी, तब इस स्थिति का पता चला। इसके बाद परिवार के सामने कई सवाल खड़े हो गए। डॉक्टरों और थेरेपिस्ट से बातचीत के दौरान यह भी समझ आया कि छोटे बच्चों में ज्यादा स्क्रीन टाइम उनकी स्थिति को और मुश्किल बना सकता है।

कमी ने दिया नया आइडिया

अपनी बेटी के लिए सही सामग्री खोजते हुए Neeti Shukla को यह महसूस हुआ कि भारत में विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए आसान और समझने योग्य किताबें बहुत कम हैं।

यहीं से उन्हें एक नई शुरुआत करने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि वे ऐसी किताबें बनाएंगी जो बच्चों के लिए सरल हों और उन्हें सीखने में मदद करें।

ब्रेनलैंड बुक्स की शुरुआत

करीब दो साल पहले उन्होंने Brainland Books की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन से दूर रखते हुए गतिविधि-आधारित सीखने का मौका देना है।

यह किताबें बच्चों के दिमाग को सक्रिय रखने और उनकी समझ को आसान बनाने के लिए तैयार की गई हैं।

कैसे अलग हैं ये किताबें

ब्रेनलैंड बुक्स की खास बात यह है कि इनमें ज्यादा टेक्स्ट के बजाय चित्रों का इस्तेमाल किया जाता है।

इनकी पहली किताब “पिक्चर बुक टू लर्न डेली रूटीन” थी, जिसमें बच्चों को रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे उठना, दांत साफ करना, नहाना और बाथरूम जाना तस्वीरों के जरिए सिखाया जाता है।

ऐसी किताबें खासतौर पर उन बच्चों के लिए फायदेमंद होती हैं जो अपनी बात शब्दों में नहीं कह पाते।

भविष्य की योजनाएं

Brainland Books आने वाले समय में और भी नई किताबें लाने की तैयारी कर रहा है। इनमें अक्षर ज्ञान, अंक ज्ञान, रंग पहचान और शुरुआती गणित जैसी चीजें शामिल होंगी।

इसके अलावा बुजुर्गों के लिए भी दिमागी कसरत, पहेलियों और लॉजिकल रीजनिंग पर आधारित किताबें लाने की योजना है, जो Parkinson’s disease, Alzheimer’s disease और Dementia जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

समाज के लिए एक नई उम्मीद

Neeti Shukla की यह पहल सिर्फ उनकी बेटी तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है।

उनकी कोशिश यह दिखाती है कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो मुश्किल हालात भी समाज के लिए एक नई राह बना सकते हैं।