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Noida: सावधान! नोएडा के इस इलाके में घर बनाया तो होंगे परेशान

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Noida: नोएडा में इस इलाके में घर बनाने वाले लोगों को होगी परेशानी, पढ़िए पूरी खबर

Noida News: अगर आप भी उत्तर प्रदेश के नोएडा (Noida) में घर बनाने की सोच रहे हैं तो पहले यह जरूरी खबर पढ़ लीजिए। नोएडा के कुछ इलाकों में घर बनाने आपके लिए सही नहीं साबित होगा। आपको बता दें कि हरनंदी-यमुना डूब क्षेत्र (Harnandi-Yamuna Flood Area) में अवैध निर्माण और फार्म हाउस (Farm House) बिक्री के विषय में मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. लोकेश एम (Dr. Lokesh M) की अध्यक्षता में सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) ऑफिस में मीटिंग हुई। इसमें जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर मनीष कुमार वर्मा, सहायक पुलिस आयुक्त विवेक रंजन भी शामिल हुए। प्राधिकरण सीईओ ने डूब क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की, कहा कि उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

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डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर लगेगी रोक

आपको बता दें कि हरनंदी और यमुना दोनों नदियों में पानी बढ़ता है तो बाढ़ के खतरे भी काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं। जनहानि की आशंका रहती है, ऐसे में डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को रोका जाए। जिससे नदियों के प्रवाह को सही रखा जा सके। अवैध निर्माण के कारण नदियों के प्रवाह पर बड़ा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यमुना-हरनंदी डूब क्षेत्र की ड्रोन कैमरा से एरियल सर्वे कराकर वर्तमान समय के निर्माणों की स्थिति को सुरक्षित रखा जाए। इसके बाद नए अवैध निर्माण होने पर संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक/लेखपाल और सिंचाई विभाग (Irrigation Department) के अधिशासी अभियंता के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

तो कहलाएंगे भूमाफिया

बैठक में निर्देश दिया गया कि डूब क्षेत्र में अवैध रूप से कॉलोनी (Colony) विकसित करने वाले और फार्म हाउस को बेचने वाले प्रमुख व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें भूमाफिया घोषित कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डूब क्षेत्र में बड़े-बड़े होर्डिंग बोर्ड लगाकर आम नागरिक को डूब क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंधित होने की जानकारी दी जाए। नदी किनारे बने अवैध रूप से फार्म हाउसों के लिए बने रास्तों को सिंचाई विभाग तोड़े।
मीटिंग में कहा गया कि उप जिलाधिकारी दादरी/सदर की अध्यक्षता में डूब क्षेत्र में प्रभावी कार्रवाई के लिए टीम बनाई जाए। जिसमें सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग, प्राधिकरण के सिविल और भूलेख विभाग के अधिकारियों को शामिल किया जाए, जो अवैध निर्माण चिह्नित कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित करेंगे।

सप्ताह में दो बार होगी समीक्षा

इन कार्यों की समीक्षा सप्ताह में दो बार करने को कहा गया। इसके साथ ही आईजी स्टांप को डूब क्षेत्र में पंजीकृत किए जाने वाले बैनामों का विवरण जिलाधिकारी कार्यालय और प्राधिकरण को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जिससे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण व फार्म हाउस के निर्माण पर रोक लगाई जा सके। साथ ही नए बैनामों में यह भी उल्लेख करवाना सुनिश्चित करें कि डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण अमान्य है।

बाढ़ आई तो खुद होंगे जिम्मेदारी

अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) सिंचाई निर्माण खंड गाजियाबाद के बैठक में कहा कि हरनंदी तटवर्ती और रिंग बंध के पास नदी के डूब क्षेत्र ग्राम में बनी अवैध आबादी में अगर बाढ़ से कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी अवैध निर्माणकर्ता की स्वयं की होगी। उसे किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया जाएगा। साथ ही अवैध निर्माण से होने वाली क्षति की वसूली अवैध निर्माणकर्ताओं से की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि एडवाइजरी जारी कर बताया गया है कि ऐसे लोग तत्काल प्रभाव से अपने अवैध निर्माण को हटा लें। डूब क्षेत्र में भवन, स्कूल, फार्म हाउस, क्रेशर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, कंक्रीट रेडी मिक्स प्लांट एवं बदरपुर सैंड की धुलाई की होदियां आदि पूरी तरह से अवैध हैं।

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शासन पहले ही कर चुका है निर्माण प्रतिबंधित

बाढ़ की वजह से इन अवैध निर्माणों के क्षतिग्रस्त होने से जन-धन की हानि हो सकती है। यह निर्माण बस्ती अवैध होने के कारण बाढ़ के समय सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन एवं शासन द्वारा सुरक्षा प्रदान किया जाना संभव नहीं हो सकेगा। शासनादेश संख्या-1417 वी 16 मार्च 2010 एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के 20 मई 2013 द्वारा ये निर्माण प्रतिबंधित कर रखे हैं।

डूब क्षेत्र में आते है ये गांव

चकशाहबेरी, छिजारसी, चोटपुर, यूसुफपुर,बहलोलपुर गढी चौखंडी, पर्थला खंजरपुर, सोहरखा जहीदाबाद, हैबतपुर, ककराला, अलीवर्दीपुर, हल्द्वानी, कुलेसरा, जलपुरा, हरनंदी यमुना दोआब बंध के निकट ग्राम इलाहाबास, सुथियाना, शहदरा, लखनावली, बेगमपुर, मुबारकपुर, गुर्जरपुर, झट्टा बादोली बांगर, सफीपुर, चुहड़पुर एवं मोमनाथल तक हिंडन नदी के डूब क्षेत्र की परिधि के अंतर्गत आते हैं।
इसी बंध पर यमुना नदी के बाएं किनारे ग्राम मोतीपुर, गढ़ी समस्तीपुर, बादौली खादर, तिलवाड़ा, कोंडली खादर, कामबक्शपुर, दोस्तपुर मंगरौली, छपरौली, गुलावली, असदुल्लापुर तथा (हरियाणा साइड) दायीं किनारे पर औरंगाबाद, दलेलपुर, याकूतपुर की भूमि डूब क्षेत्र की परिधि में आती है।