Noida Authority: अगर आप नोएडा में प्लॉट, फ्लैट या किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नोएडा प्राधिकरण ने सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए लोगों से कुछ विशेष खसरा नंबरों में स्थित जमीन या निर्माणाधीन परियोजनाओं की खरीद-फरोख्त से बचने की अपील की है। प्राधिकरण का कहना है कि ये जमीनें पहले से अधिग्रहित, अधिसूचित या प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में हैं, जहां अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माण किए गए हैं।
किन इलाकों के लिए जारी हुई चेतावनी?
प्राधिकरण की चेतावनी सालारपुर खादर, भंगेल बेगमपुर और हाजीपुर गांवों के कुछ विशेष खसरा नंबरों पर लागू होती है। इन क्षेत्रों में कुछ लोगों द्वारा अवैध निर्माण और अतिक्रमण किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे भूखंडों या भवनों की खरीद करने वाले लोगों को भविष्य में कानूनी विवाद, वित्तीय नुकसान और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
खरीदारों को किन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है?
नोएडा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन चिन्हित जमीनों पर किसी भी प्रकार की स्वीकृत लेआउट योजना या भवन मानचित्र मंजूर नहीं है। ऐसे में यहां खरीदी गई संपत्ति पर भविष्य में ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन), सीलिंग, एफआईआर जैसी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा इन क्षेत्रों में बिजली, पानी, सीवर, सड़क और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले क्या करें?
प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्लॉट, फ्लैट या भवन में निवेश करने से पहले उसका खसरा नंबर, भूमि स्वामित्व, भूमि उपयोग, प्राधिकरण की स्वीकृति और भवन नक्शे का सत्यापन अवश्य करें। केवल ब्रोकर या बिल्डर के भरोसे निवेश करने के बजाय आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है।
ये हैं प्रमुख खसरा नंबर
प्राधिकरण की सूची में सालारपुर खादर के खसरा नंबर 700–711, 723, 724, 728–735, 745–752, 759, 760, 762–764, 779, 780 और 795–798, भंगेल बेगमपुर के 176, 178, 217, 221, 223, 225, 226, 247, 250 और 251, तथा हाजीपुर का खसरा नंबर 412 शामिल है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
निवेश से पहले पूरी जांच जरूरी
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि कम कीमत या आकर्षक ऑफर देखकर जल्दबाजी में निवेश करना भारी पड़ सकता है। खरीदारों को भूमि के दस्तावेज, प्राधिकरण की मंजूरी, स्वामित्व रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति की पूरी जांच करने के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए। इससे भविष्य में कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।
