MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरियों से जुड़े एक पुराने नियम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने दो से अधिक बच्चों वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी से वंचित करने वाले प्रावधान को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। करीब 25 साल पुराने इस नियम को हटाने के फैसले को लाखों युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
क्या था पुराना नियम?
मध्य प्रदेश में वर्ष 2001 से लागू नियम के अनुसार दो से अधिक जीवित बच्चों वाले व्यक्ति को कुछ सरकारी सेवाओं के लिए अयोग्य माना जाता था। इस प्रावधान का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था। समय के साथ इस नियम को लेकर कई तरह की बहस होती रही।
अब सरकार ने बदली नीति
ताजा निर्णय के तहत सरकार ने इस प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी नौकरी से जुड़ी नई सेवा शर्तों के मसौदे में पहले शामिल प्रावधान को वापस लिया जा रहा है और संबंधित प्रारूप को सरकारी पोर्टल से भी हटा दिया गया है।
लाखों अभ्यर्थियों को मिलेगा फायदा
इस बदलाव के बाद ऐसे अभ्यर्थियों के लिए भी सरकारी नौकरियों के अवसर खुल सकेंगे जो केवल दो बच्चों की शर्त के कारण आवेदन करने से वंचित रह जाते थे। माना जा रहा है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक समावेशी बनेगी और रोजगार के अवसरों का दायरा बढ़ेगा।
पहले ड्राफ्ट में था सख्त प्रावधान
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में जारी सेवा नियमों के एक ड्राफ्ट में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी न देने का प्रावधान शामिल किया गया था और इस पर सुझाव भी मांगे गए थे। बाद में सरकार ने इस मसौदे पर पुनर्विचार करते हुए इसे हटाने का फैसला किया।
25 साल पुराने नियम का होगा अंत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह फैसला राज्य में लगभग ढाई दशक से लागू व्यवस्था को समाप्त कर देगा। इससे पहले भी सरकार इस नियम में बदलाव के संकेत दे चुकी थी और 2025 में इसे हटाने की चर्चा सामने आई थी।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल सरकारी भर्ती से जुड़ा बदलाव नहीं है, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सरकार इसे समान अवसर और रोजगार के अधिकार से जुड़े कदम के रूप में देख रही है।
अब आगे क्या होगा?
सरकार द्वारा अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद नया नियम प्रभावी होगा। इसके बाद भर्ती प्रक्रियाओं में दो बच्चों की सीमा को अयोग्यता का आधार नहीं माना जाएगा। फिलहाल युवाओं और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजर सरकार की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।
