Jharkhand News: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के स्थापना दिवस के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कुछ समय के लिए बेहद भावुक हो गए और अपनी आँखों में आंसू लिए “दिशोम गुरु” शिबू सोरेन को याद किया। यह पल तब सामने आया जब उन्होंने मंच से अपने पूर्व नेता और आदिवासी संघर्ष के महत्वपूर्ण चेहरे को याद करते हुए कहा कि उनके आदर्श और संघर्ष हमेशा झारखंड के लोगों के लिए प्रेरणा रहेंगे।
‘दिशोम गुरु’ को याद करते हुए आया भावनात्मक पल
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिबू सोरेन के नेतृत्व में आम जनता की एकजुटता और वर्षों तक चलने वाले संघर्ष ने बिहार से अलग होकर झारखंड को अस्तित्व दिया। जैसे ही उन्होंने गुरुजी के योगदान और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को याद किया, उनके आँखों में आंसू आ गए और कुछ क्षण के लिए वे भावनात्मक रूप से प्रभवित नजर आए।
उन्होंने यह भी कहा कि आज शिबू सोरेन के दिखाए रास्ते पर चलकर झारखंड के लोग सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, उनके विचार और आदर्श आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।
Jharkhand News: केंद्र सरकार पर कटाक्ष: बजट में झारखंड की उपेक्षा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा पेश हालिया बजट में झारखंड का नाम तक नहीं लिया गया, जबकि राज्य के पास देश की 42 प्रतिशत खनिज संपदा है। यह बात उन्होंने state-level विकास और संसाधनों के हक की मांग के संदर्भ में कही और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड अब अपने हक और अधिकारों के लिए जमीन पर संघर्ष के साथ-साथ विधिक रास्ता भी अपनाएगा, ताकि राज्य की जनता को न्याय और समान अवसर मिल सके।
बड़ी रैली और संगठन की एकजुटता
इस स्थापना दिवस के मौक़े पर झामुमो कार्यकर्ताओं की एक बड़ी रैली भी निकाली गई, जिसका नेतृत्व विधायक बसंत सोरेन के नेतृत्व में किया गया। रैली में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ शामिल हुए और शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी गई।
इसका उद्देश्य सिर्फ जश्न मनाना नहीं था, बल्कि झारखंड की सामाजिक पहचान और संसाधनों के संरक्षण के लिए एकजुटता का प्रियास भी था, ताकि राज्य के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सुना जा सके।
जेएमएम के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भावुक होना और “दिशोम गुरु” शिबू सोरेन को याद कर आँसू बहाना इस बात का प्रतीक है कि झारखंड के राजनीतिक इतिहास में गुरुजी का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है। यह दिन न केवल संगठन के इतिहास में महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राज्यवासियों को अपनी पहचान, अधिकार और संसाधनों के लिए एक बार फिर से एकजुट होने का संदेश भी देता है।
