Jharkhand News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum-2026) की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए दावोस, स्विट्ज़रलैंड में हैं। इस दौरान वे झारखंड की निवेश संभावनाओं, विकास मॉडल और राज्य की प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विशेषताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।
वैश्विक मंच पर झारखंड की पहली मजबूत प्रस्तुति
इस वर्ष झारखंड पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर अपनी एक उच्चस्तरीय प्रस्तुति देने जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दावोस सम्मेलन में भाग ले रहा है, जहां वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं से सीधे संवाद करेंगे।
राज्य का लक्ष्य है कि निवेशक झारखंड की खनिज संपदा, औद्योगिक ढांचा, हरित ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, और सतत विकास के अवसरों को समझें और यहां निवेश के लिए सकारात्मक निर्णय लें।
‘झारखंड मंडप’ और निवेश संभावनाओं का प्रदर्शन
19 जनवरी से शुरू हो रहे सम्मेलन में झारखंड का समर्पित राज्य पवेलियन (स्टेट पवेलियन) 20 जनवरी को उद्घाटन करेगा। इस पवेलियन में राज्य की निवेश संभावनाओं, नीति सुधारों और दीर्घकालिक विकास योजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वैश्विक कंपनियों और संस्थानों के प्रमुखों से मुलाकात कर रहे हैं, जिनमें टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, बुनियादी ढांचे और उद्योग से जुड़े नेतृत्व शामिल है।
प्रकृति, संस्कृति और पर्यटन की नई पहचान
दावोस बैठक में झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण-अनुकूल विकास और सांस्कृतिक विरासत को भी विश्व समुदाय के सामने रखा जा रहा है। खासकर राज्य की प्रकृति-एडवेंचर पर्यटन, जंगलों, जलप्रपातों और आध्यात्मिक केंद्रों को आकर्षक रूप से पेश किया जा रहा है ताकि पर्यटन में भी निवेश सम्भव हो।
राज्य के “Growth in Harmony with Nature” (प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास) के दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष रूप से रेखांकित किया जा रहा है, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखता है।
ऐतिहासिक पर्यावरण और धरोहर की पहचान
साथ ही मुख्यमंत्री ने दावोस और UK यात्रा के दौरान झारखंड की पुरातात्विक धरोहरों—मेगालीथ स्थलों को भी वैश्विक दर्शकों के सामने लाने की योजना पर जोर दिया है। इन प्राचीन संरचनाओं के लिए UNESCO विश्व धरोहर टैग प्राप्त करने की कोशिश भी राज्य द्वारा की जा रही है।
भविष्य की दिशा और विकास लक्ष्य
इस भागीदारी का उद्देश्य सिर्फ निवेश लाना नहीं है, बल्कि झारखंड को वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय, सतत, और सामाजिक-पर्यावरण संतुलन वाला विकास मॉडल बताना भी है। मुख्यमंत्री इस मंच को राज्य की 2050 की दीर्घकालिक विकास दृष्टि के हिस्से के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
