Jharkhand News: हेमंत सोरेन ने बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष पर बैठक कर सुरक्षा निर्देश दिए

झारखंड
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Jharkhand News: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) को लेकर चिंताजनक स्थिति को देखते हुए आज रांची के मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल के दिनों में हाथियों के हमलों से बढ़ रही लोगों की जान और संपत्ति के नुकसान को रोकने के उपायों पर चर्चा करना था। उन्होंने अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए कि राज्य में एक भी मानव मृत्यु हाथी के हमले से न हो, इसके लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएं।

हाल की घटनाओं ने चिंता बढ़ाई

झारखंड में हाल के दिनों में हाथियों के अचानक और तीव्र हमलों से कई लोगों की मौतें हुई हैं, इस समस्या से ग्रामीण इलाकों में भय व्याप्त है। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि इन घटनाओं का आंकड़ा, कारण और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जानकारी एकत्रित कर पूरा डेटा तैयार किया जाए। इसके अलावा राज्य के सभी हाथी मार्गों (Elephant Corridors) को नक्शे पर चिह्नित करने के निर्देश भी दिए गए ताकि हाथियों के आवागमन को समझकर बेहतर रणनीति बनाई जा सके।

सुरक्षा और जवाबदेही के सख्त निर्देश

सीएम हेमंत सोरेन ने स्पष्ट कहा कि हाथियों के हमले से मानव जीवन का नुकसान किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने वन विभाग को त्वरित मुआवजा योजना लागू करने, प्रभावित परिवारों को 12 दिन के भीतर मुआवजा देने और आवश्यकतानुसार तेज़ रेस्क्यू टीम बनाकर प्रशिक्षित हाथी तथा कर्मचारी तैयार करने पर सख्त निर्देश दिए हैं। इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी और प्रशासन की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

लंबे समय तक समाधान की तैयारी

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हाथियों और मनुष्यों के बीच टकराव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी बनाई जाएगी। इसमें हाथियों के पारिस्थितिक आवास और एलिफेंट रेस्क्यू मैकेनिज़्म के लिए विशेष प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और सहयोगी उपायों पर जोर होगा। सिरका व अन्य प्रभावित क्षेत्रों जैसी जगहों पर देखरेख और पठान को बढ़ाना भी योजना का हिस्सा होगा।

ग्रामीणों को सुरक्षा और जागरूकता

सीएम ने कहा कि सरकार ग्रामीण और जंगल के पास बसे समुदायों को सुरक्षा उपायों, चेतावनी संकेतों और हाथियों के संभावित रूट के बारे में जानकारी देने पर भी काम करेगी। इससे स्थानीय लोगों को यह पता रहेगा कि किन इलाकों में हाथियों का आवागमन अधिक है और वे स्वयं अपनी सुरक्षा का ध्यान रख सकेंगे।