Jharkhand News: छत्तीसगढ़ में आवासीय योजनाओं और विकास कार्यों को समझने के लिए झारखंड राज्य आवास बोर्ड की 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम अध्ययन दौरे पर रायपुर पहुंची है। यह टीम 15 से 18 अप्रैल 2026 तक राज्य में रहकर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की योजनाओं, नियमों और नई तकनीकों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
इस अध्ययन का उद्देश्य भविष्य में झारखंड में आवास योजनाओं को और बेहतर बनाना और जरूरत पड़ने पर नए कानून तैयार करना है।
आवास योजनाओं और कार्यप्रणाली की दी गई विस्तृत जानकारी
अध्ययन दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अधिकारियों ने टीम को विभिन्न योजनाओं और नीतियों की जानकारी दी।
इस दौरान अधिकारियों ने:
- संपत्ति प्रबंधन और मार्केटिंग प्रणाली की जानकारी दी
- विक्रय प्रक्रिया और आईटी आधारित सेवाओं का विवरण साझा किया
- वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी कार्यप्रणाली पर प्रस्तुति दी
अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम के उपयोग से आवास योजनाओं को अधिक पारदर्शी और आसान बनाया गया है।
एक वर्ष में 1100 करोड़ रुपए की संपत्तियों का विक्रय
छत्तीसगढ़ में आवास योजनाओं के तहत पिछले एक वर्ष में बड़ी उपलब्धियां हासिल की गई हैं। सरकार के अनुसार:
- करीब 1100 करोड़ रुपये की 5145 संपत्तियों का विक्रय किया गया
- ओटीएस-2 योजना के तहत 174 करोड़ रुपये की 1105 पुरानी संपत्तियों का निस्तारण हुआ
- लोगों की सुविधा के लिए आबंटी पोर्टल और एआई चैटबोट जैसी डिजिटल सेवाएं शुरू की गईं
इन प्रयासों से आम नागरिकों को किफायती दरों पर घर उपलब्ध कराने में मदद मिली है।
3050 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुई 78 नई आवासीय परियोजनाएं
सरकार ने पिछले दो वर्षों में आवास क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश किया है।
मुख्य उपलब्धियां:
- 3050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत
- 7 रि-डेवलपमेंट परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार
- किफायती आवास योजनाओं को तेजी से लागू करने का लक्ष्य
इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर और सस्ते घर उपलब्ध कराना है।
नए कानून और नीतियों के लिए किया जा रहा अध्ययन
झारखंड राज्य आवास बोर्ड इस अध्ययन के माध्यम से अपने राज्य में आवास संबंधी कानूनों और नीतियों को अपडेट करना चाहता है।
टीम विशेष रूप से इन विषयों पर अध्ययन कर रही है:
- आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक उपयोग की समस्या
- “मिश्रित उपयोग” (Mixed Use) की नई व्यवस्था
- आधुनिक और पारदर्शी आवास प्रबंधन प्रणाली
इस अध्ययन के आधार पर भविष्य में झारखंड में नए नियम या कानून बनाए जा सकते हैं।
दोनों राज्यों का गठन एक ही वर्ष में हुआ, लेकिन विकास की रफ्तार अलग
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों का गठन वर्ष 2000 में हुआ था। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में गृह निर्माण मंडल ने तेजी से आवासीय योजनाओं का विस्तार किया है। इससे हजारों लोगों को किफायती दरों पर पक्के मकान मिल पाए हैं और शहरी विकास को भी बढ़ावा मिला है। झारखंड आवास बोर्ड की टीम का यह अध्ययन दौरा दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे आवास योजनाओं में सुधार, नई नीतियों का निर्माण और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने में मदद मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि आने वाले समय में हर नागरिक को सुरक्षित और किफायती घर उपलब्ध कराया जा सके।
