Greater Noida के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में स्थित शारदा यूनिवर्सिटी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है।
Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में स्थित शारदा यूनिवर्सिटी (Sharda University) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। बीटेक (B.Tech) के अंतिम वर्ष के 24 वर्षीय छात्र शिवम डे (Shivam Dey) ने 15 अगस्त 2025 की रात अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक छात्र बिहार के पूर्णिया जिले का निवासी था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पढ़िए पूरी खबर…

सुसाइड नोट से मिले बड़े खुलासे
आपको बता दें कि छात्र के कमरे से बरामद सुसाइड नोट में शिवम ने सबसे पहले ‘I am Sorry’ लिखकर अपने कदम पर अफसोस जताया। उसने यूनिवर्सिटी से अपील की कि उसकी फीस परिवार को लौटा दी जाए। इसके साथ ही उसने अपने अंग दान करने की इच्छा भी जताई। नोट में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया।
परिवार का आरोप, कॉलेज ने नहीं दी जानकारी
मृतक के परिजनों ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि शिवम पिछले दो साल से कॉलेज नहीं जा रहा था, लेकिन इसकी जानकारी कभी उन्हें नहीं दी गई। पिता कार्तिक डे ने कहा कि यदि कॉलेज समय रहते सच बता देता, तो शायद आज बेटे की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी फीस लेती है तो उसकी जिम्मेदारी है कि अभिभावकों को सूचित करे।
पिता बोले- ‘वो मेरे जिगर का टुकड़ा था’
नोएडा पहुंचे पिता कार्तिक डे ने बताया कि शिवम 2 अगस्त को ही घर से वापस लौटा था। इससे पहले वह दो महीने तक घर पर रहा और सबकुछ सामान्य था। पिता ने कहा कि अगर शिवम पढ़ाई छोड़ना चाहता तो साफ बता देता। उन्होंने आंसू भरी आंखों से कहा- “वो मेरे जिगर का टुकड़ा था। अगर पढ़ना नहीं था, तो मना कर देता।”
हूबहू पढ़िए सुसाइड नोट की बातें
सुसाइड नोट में शिवम ने लिखा- ‘अगर आप इसे पढ़ रहे हैं तो मैं मर चुका हूं। मेरी मौत का जिम्मेदार मैं खुद हूं। किसी को इसके लिए परेशान न किया जाए। मेरी फीस परिवार को लौटा दी जाए। मैं इस शिक्षा व्यवस्था के लिए उपयुक्त नहीं हूं। देश को महान बनना है तो सही शिक्षा प्रणाली की जरूरत है। अगर मेरे शरीर के अंग काम कर रहे हैं तो उन्हें दान कर दिया जाए। बाबा-मां सॉरी, मैं आपके बुढ़ापे का सहारा नहीं बन सका।’

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दी सफाई
शारदा यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दावा किया कि शिवम का सीजीपीए लगातार कम आता रहा। उसे सुधार का मौका दिया गया, समर टर्म और विशेष परीक्षा भी कराई गई, लेकिन वह आवश्यक मानदंड पूरे नहीं कर सका। यूनिवर्सिटी ने उसे 40 प्रतिशत फीस पर दोबारा प्रवेश का विकल्प दिया था। हालांकि उसने नए सत्र में खुद को पंजीकृत नहीं कराया। प्रशासन ने परिजनों को जमा शुल्क लौटाने का आश्वासन दिया है।
पुलिस जांच में जुटी
एडिशनल डीसीपी सुधीर कुमार ने कहा कि छात्र के पास से सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। फिर भी पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारी ने कहा कि यदि परिजन कोई शिकायत दर्ज कराते हैं तो उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि शिवम के सुसाइड नोट में शिक्षा व्यवस्था पर उठाए गए सवालों ने एक बार फिर अकादमिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। यह पहली बार नहीं है जब शारदा यूनिवर्सिटी में ऐसी घटना हुई है। जुलाई 2025 में, यूनिवर्सिटी की बीडीएस सेकंड ईयर की एक छात्रा ने भी हॉस्टल में आत्महत्या की थी, जिसमें उसने दो प्रोफेसरों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इन घटनाओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन और देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जरूरी सूचना: यदि आपके मन में कभी आत्महत्या का विचार आता है, तो यह एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति है। ऐसी स्थिति में तुरंत जीवनसाथी हेल्पलाइन नंबर 1800-233-3330 या टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800-914-416 पर संपर्क करें। इन हेल्पलाइनों पर आपकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और हर संभव सहायता प्रदान की जाती है। हमेशा याद
