Greater Noida: उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में लोगों की यात्रा को आसान बनाने के लिए जल्द ही फीडर बस सेवा शुरू होने जा रही है। यह बसें खासतौर पर मेट्रो से जुड़ी लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाई जाएंगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) के साथ समन्वय पूरा हो चुका है। इस नई व्यवस्था से लगभग 2 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और बसें मई महीने से सड़कों पर दौड़ना शुरू कर देंगी।
कितनी बसें चलेंगी और कितनी रहेंगी स्टैंडबाय
इस योजना के तहत कुल 50 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। इनमें से 45 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए संचालित होंगी, जबकि 5 बसों को स्टैंडबाय पर रखा जाएगा, ताकि किसी तकनीकी समस्या या अतिरिक्त भीड़ की स्थिति में तुरंत सेवा उपलब्ध कराई जा सके। बसों की उपलब्धता हर 15 मिनट के अंतराल पर सुनिश्चित की जाएगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और यात्रा सुगम बनेगी।
किन रूटों पर चलेगी फीडर बस सेवा
इन बसों का संचालन 4 रूटों पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। इन सभी रूटों की शुरुआत नोएडा के सेक्टर-90 स्थित बस डिपो और बॉटेनिकल गार्डन को प्रारंभिक बिंदु मानकर की जाएगी। पहला रूट सेक्टर-90 (डिपो) और बॉटेनिकल गार्डन (प्रारंभ बिंदु) से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ चौक एक मूर्ति तक तय किया गया है, जिससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों को सीधे मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी।
दूसरा रूट सेक्टर-90 (डिपो) और बॉटेनिकल गार्डन (प्रारंभ बिंदु) से जेवर एयरपोर्ट तक चलेगा, जिससे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। तीसरा रूट सेक्टर-90 (डिपो) और बॉटेनिकल गार्डन (प्रारंभ बिंदु) से नोएडा सेक्टर-62 (अंतिम बिंदु) तक निर्धारित किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण ऑफिस और आईटी हब है।
चौथा रूट सेक्टर-90 (डिपो) और बॉटेनिकल गार्डन (प्रारंभ बिंदु) से फेस-2 नोएडा होते हुए सूजरपुर कलेक्ट्रेट, ग्रेटर नोएडा (अंतिम बिंदु) तक जाएगा। इस रूट से औद्योगिक क्षेत्र और प्रशासनिक कार्यालयों तक पहुंचने वाले लोगों को सीधी और आसान यात्रा सुविधा मिलेगी।
लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
फीडर बस सेवा का मुख्य उद्देश्य मेट्रो यात्रियों को उनके अंतिम गंतव्य तक आसानी से पहुंचाना है। अभी कई यात्रियों को मेट्रो स्टेशन से अपने घर या कार्यालय तक पहुंचने में दिक्कत होती है, लेकिन इन बसों के शुरू होने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। पहले चरण में 9 मीटर और 12 मीटर लंबाई की दो श्रेणियों की बसें उतारी जाएंगी, जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगी और पर्यावरण के अनुकूल होंगी। इन बसों का संचालन उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा किया जाएगा।
बस डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी
इस नई सेवा के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है। नोएडा के सेक्टर-90 में एक आधुनिक बस डिपो बनाया जाएगा, जहां बसों के लिए ईवी चार्जिंग पॉइंट, मेंटेनेंस सेंटर, ड्राइवर और कंडक्टर के आराम स्थल तथा कार्यालय कर्मचारियों के लिए अलग कमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। यहां 20 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिनमें एक साथ 50 बसों को चार्ज करने की क्षमता होगी।
इसके अलावा बॉटेनिकल गार्डन बस स्टैंड पर 4 अतिरिक्त चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें एक समय में 8 बसें चार्ज हो सकेंगी। वहीं, मोरना बस डिपो में ई-चार्जिंग पॉइंट्स पहले से ही तैयार किए जा चुके हैं, जिससे बस संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।
टिकट व्यवस्था और संचालन का खर्च
इन फीडर बसों का किराया उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा तय टिकट दरों के अनुसार लिया जाएगा। बस संचालन को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाए रखने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का भुगतान नोएडा प्राधिकरण की ओर से किया जाएगा। इससे सेवा नियमित और सुचारु रूप से चलती रहेगी।
ट्रैफिक जाम में आएगी कमी और यात्रा होगी आसान
फीडर बस सेवा शुरू होने से नोएडा के लोगों को बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से सेक्टर-62, गौड़ चौक ग्रेटर नोएडा वेस्ट, जेवर एयरपोर्ट, फेस-2 औद्योगिक क्षेत्र और कलेक्ट्रेट तक सीधे और आसान आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही छोटे निजी वाहनों की संख्या कम होने से सड़कों पर ट्रैफिक जाम में भी कमी आने की संभावना है और शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।
नोएडा में शुरू होने वाली इलेक्ट्रिक फीडर बस सेवा शहर की परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे न केवल लोगों को बेहतर और सस्ती यात्रा सुविधा मिलेगी, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी। मई महीने से इस सेवा के शुरू होने के बाद नोएडा के यात्रियों को रोजमर्रा की यात्रा में काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
