Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। Raipur में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने युवा पत्रकार निशा द्विवेदी की पुस्तक ‘मोदी के राज्य से लौटकर’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यात्रा वृत्तांत न केवल अनुभवों को साझा करता है, बल्कि इतिहास और संस्कृति को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
पत्रकारिता और लेखन का सुंदर संगम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकार और जनप्रतिनिधि दोनों ही समाज के प्रति जिम्मेदार होते हैं और अपने कार्य में लगातार व्यस्त रहते हैं। ऐसे में पत्रकारिता के साथ-साथ लेखन के लिए समय निकालना आसान नहीं होता।
उन्होंने निशा द्विवेदी के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने एक पत्रकार की दृष्टि से गुजरात यात्रा को जिस तरह प्रस्तुत किया है, वह प्रेरणादायक है।
महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण से मिली प्रेरणा
इस पुस्तक की खास बात यह है कि यह छत्तीसगढ़ की महिला पत्रकारों के गुजरात भ्रमण पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पहली बार राज्य की 26 महिला पत्रकारों का एक दल अध्ययन भ्रमण पर गया था।
इस यात्रा का उद्देश्य विकास के मॉडल को समझना और उससे सीख लेना था, ताकि पत्रकार अपने अनुभवों को समाज के सामने रख सकें।
अनुभवों को लेखन के रूप में लाने की पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने पहले ही महिला पत्रकारों को अपने अनुभवों को लिखने के लिए प्रेरित किया था। यह पुस्तक उसी सुझाव का परिणाम है, जिसमें यात्रा के अनुभवों को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इससे अन्य पत्रकारों को भी लेखन के लिए प्रेरणा मिलेगी।
पत्रकारों के लिए सरकार का समर्थन
सरकार द्वारा पत्रकारों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट में पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट का प्रावधान भी किया गया है।
इसके तहत पत्रकारों को देश के विभिन्न राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल और राजस्थान में जाकर विकास कार्यों को देखने और समझने का अवसर दिया जा रहा है।
यह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम यह दर्शाता है कि जब पत्रकारिता और साहित्य एक साथ आते हैं, तो समाज को नई दिशा मिलती है।
यात्रा वृत्तांत के माध्यम से न केवल नए अनुभव साझा होते हैं, बल्कि देश की विविध संस्कृति और विकास की झलक भी लोगों तक पहुंचती है। यह पहल भविष्य में और भी ऐसे रचनात्मक प्रयासों को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती है।
