Chhattisgarh News: अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार वनमंडल में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों को प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और सामुदायिक भागीदारी के प्रति जागरूक किया गया।
जनसहभागिता के साथ हुए कई कार्यक्रम
वन विभाग द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों में:
- संगोष्ठी
- शपथ ग्रहण
- चित्रकला प्रतियोगिता
- सीड बॉल निर्माण
- पौधरोपण अभियान
- जन-जागरूकता कार्यशालाएं
- सांस्कृतिक कार्यक्रम
जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रमों में ग्रामीणों, विद्यार्थियों, वन समिति के सदस्यों, शिक्षकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
जैव विविधता को बताया जीवन का आधार
बलौदाबाजार के वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि जैव विविधता केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण संतुलन का आधार है।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण देने के लिए बच्चों और युवाओं को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना बेहद जरूरी है।
अलग-अलग वन क्षेत्रों में हुए आयोजन
बल्दाकछार, सोनाखान, परसदा और कोशमसरा क्षेत्रों में विशेष संगोष्ठियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में ग्लोबल वार्मिंग, वन्यजीव संरक्षण और पेड़ों के महत्व पर चर्चा हुई।
बच्चों ने बनाई सीड बॉल और चित्र
बलौदाबाजार परिक्षेत्र के ग्राम अर्जुनी स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता और सीड बॉल निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई।
वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. एकता कर ने ग्रामीणों और छात्रों को जैव विविधता संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
बारनवापारा अभयारण्य में भी चला अभियान
Barnawapara Wildlife Sanctuary के ग्राम हरदी में आयोजित कार्यशाला में ग्रामीणों को मानव-वन्यप्राणी संघर्ष से बचाव और वन्यजीव संरक्षण के बारे में जानकारी दी गई।
देवपुर नेचर कैंप में पौधरोपण और जागरूकता
देवपुर नेचर कैंप में:
- सीड बॉल निर्माण
- सघन पौधरोपण
- जैव विविधता संरक्षण शपथ
जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस दौरान बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक कृषानू चंद्राकार, परिक्षेत्र अधिकारी रूपेश्वरी दीवान, संतोष पैंकरा, महिला स्व-सहायता समूह और स्थानीय समितियों के सदस्य भी मौजूद रहे।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्रकृति और जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रेरित करना था ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सके और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य मिल सके।
