Chhattisgarh News: नगरीय निकायों को 22.6 करोड़ की आपात निधि, मरम्मत-संधारण कार्यों को मिलेगी रफ्तार

छत्तीसगढ़

Chhattisgarh News: रायपुर, 25 जून 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के नगरीय निकायों को मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए 22 करोड़ 6 लाख रुपये की आपात निधि जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही, यानी अप्रैल से जून अवधि के लिए यह राशि जारी की है।

यह राशि उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के निर्देश पर जारी की गई। विभागीय संचालनालय ने राज्य के सभी पात्र नगरीय निकायों को यह धनराशि हस्तांतरित कर दी है, ताकि स्थानीय स्तर पर जरूरी मरम्मत और रखरखाव के काम बिना देरी के किए जा सकें।

मरम्मत और संधारण कार्यों के लिए जारी हुई पहली तिमाही की राशि

नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से जारी यह निधि मुख्य रूप से नगरीय निकायों के नियमित मरम्मत, संधारण और जरूरी स्थानीय ढांचागत जरूरतों को पूरा करने के लिए दी गई है। इसका मकसद यह है कि शहरों और कस्बों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़े छोटे लेकिन जरूरी काम समय पर पूरे हो सकें।

विभाग ने यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए जारी की है। यानी अप्रैल, मई और जून के दौरान नगरीय निकायों को जिन तत्काल कार्यों के लिए संसाधनों की जरूरत होती है, उन्हें ध्यान में रखते हुए यह आपात निधि उपलब्ध कराई गई है।

14 नगर निगमों को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

राज्य के 14 नगर निगमों को इस आपात निधि में सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगमों के लिए कुल 13 करोड़ 76 लाख रुपये जारी किए हैं।

यह आवंटन इस बात को भी दिखाता है कि बड़े शहरी निकायों में मरम्मत और संधारण की जरूरतें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं। सड़कों, नालियों, सार्वजनिक भवनों, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य शहरी सुविधाओं के रखरखाव के लिए ऐसी राशि अहम मानी जाती है।

56 नगर पालिकाओं के लिए 5.18 करोड़ रुपये

विभाग ने राज्य की 56 नगर पालिकाओं के लिए कुल 5 करोड़ 18 लाख रुपये की राशि जारी की है। यह धनराशि उन कस्बाई और मध्यम शहरी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सीमित संसाधनों के बीच रोजमर्रा के रखरखाव कार्यों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता है।

नगर पालिकाओं के स्तर पर यह राशि सफाई, छोटे मरम्मत कार्य, सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाओं के संचालन में मददगार हो सकती है। इससे स्थानीय प्रशासन को तत्काल जरूरतों पर तेजी से काम करने की सुविधा मिलेगी।

124 नगर पंचायतों को भी मिली 3.66 करोड़ की सहायता

राज्य की 124 नगर पंचायतों के लिए भी सरकार ने कुल 3 करोड़ 66 लाख रुपये की आपात निधि जारी की है। यह राशि छोटे शहरी और तेजी से विकसित हो रहे कस्बाई क्षेत्रों के लिए अहम मानी जा रही है।

नगर पंचायतों में अक्सर सीमित बजट के कारण बुनियादी रखरखाव कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे में यह आपात निधि स्थानीय निकायों को आवश्यक मरम्मत, साफ-सफाई, सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव और अन्य छोटे लेकिन जरूरी कार्यों को गति देने में मदद कर सकती है।

अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने जारी की राशि

नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभागीय संचालनालय ने यह राशि जारी की। सरकार की ओर से यह संकेत भी माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के रखरखाव को प्राथमिकता दी जा रही है।

आपात निधि जारी करने का मकसद यह भी है कि निकायों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े। स्थानीय निकायों के पास यदि न्यूनतम वित्तीय संसाधन उपलब्ध हों, तो वे तत्काल मरम्मत और संधारण के काम तेजी से कर सकते हैं।

शहरी बुनियादी ढांचे के रखरखाव पर सरकार का फोकस

इस आवंटन को शहरी प्रशासन के उस फोकस के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसमें सरकार केवल बड़े विकास कार्यों पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की शहरी जरूरतों और रखरखाव पर भी जोर देना चाहती है। सड़क, नाली, सार्वजनिक भवन, जल व्यवस्था और अन्य बुनियादी ढांचे का नियमित संधारण नागरिक जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा होता है।

छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यह जरूरी हो जाता है कि स्थानीय निकायों को नियमित रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन मिलते रहें। इसी लिहाज से यह आपात निधि शहरी प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहारा मानी जा सकती है।

अब नजर जमीनी इस्तेमाल पर

सरकार ने नगरीय निकायों को पहली तिमाही के लिए राशि तो जारी कर दी है, लेकिन अब असली सवाल इसके प्रभावी उपयोग का होगा। यह देखना अहम रहेगा कि नगर निगम, नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें इस धनराशि का इस्तेमाल किन प्राथमिकताओं के आधार पर करती हैं और आम लोगों को इसका फायदा किस रूप में दिखता है।

फिलहाल इतना साफ है कि राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में मरम्मत और संधारण कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय स्तर पर शुरुआती कदम उठा दिया है। आने वाले महीनों में इसका असर स्थानीय नागरिक सुविधाओं और शहरी बुनियादी ढांचे की स्थिति पर देखा जाएगा।