Bihar News: सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी पर दो टूक कहा – कानून जारी रहेगा

बिहार
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Bihar News: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान Madhav Anand, जो Rashtriya Lok Morcha से विधायक हैं, ने राज्य में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि अब लगभग एक दशक पहले लागू किए गए इस कानून के प्रभाव और परिणामों का आकलन करना आवश्यक है, ताकि यह समझा जा सके कि इसका वास्तविक असर क्या रहा है।

माधव आनंद ने कहा कि शराबबंदी लागू करते समय कई विचारों और आंकड़ों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया गया था, लेकिन समय-समय पर समीक्षा की परंपरा रही है और शराबबंदी पर भी वैसी ही समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने और कानून को बेहतर तरीके से लागू करने पर भी काम किया जाना चाहिए, जहां आवश्यक हो संशोधन किया जाना चाहिए।

समीक्षा की मांग पर सरकार का रुख

विधायक की इस मांग के बाद बिहार सरकार के सहयोगी दल के वरिष्ठ नेता, जेडीयू के मंत्री Vijay Kumar Choudhary ने सदन में स्पष्ट कर दिया कि शराबबंदी कानून लागू है और वर्तमान में इसे हटाने या ढिलाई से लागू किए जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का रुख है कि प्रवर्तन मजबूत होना चाहिए, लेकिन समीक्षा के नाम पर कानून में ढिलाई नहीं दी जा सकती है।

सरकार ने यह भी कहा कि शराबबंदी को लागू करते समय सदन में व्यापक समर्थन मिला था और यह कानून राज्य में शराब के दुरुपयोग और उससे जुड़ी सामाजिक समस्याओं को कम करने की कोशिश है। इसलिए फिलहाल शराबबंदी को बरकरार रखा जाएगा और इसी के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे।

सदन में सियासी बहस और विपक्ष की टिप्पणियाँ

माधव आनंद की मांग के बाद सदन में सियासी बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने शराबबंदी के प्रभावों, अवैध शराब तस्करी और कानून के प्रभावी कार्यान्वयन पर सवाल उठाए हैं। कुछ विधायकों ने कहा है कि शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब कारोबार में वृद्धि हुई है और कानून का सही से पालन नहीं हो पा रहा है, जिससे सामाजिक समस्याएं बनी हुई हैं।

वहीं सरकार की तरफ से बताया गया है कि शराबबंदी से शराब संबंधित अपराधों में कमी आई है और कानून को अधिक सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि समीक्षा की मांग को समझा गया है, लेकिन फिलहाल लागू कानून पर कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

समीक्षा पर बढ़ता विवाद

शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में अवैध शराब की तस्करी और बंद शराब की जब्ती के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2025 में 36.3 लाख लीटर से अधिक शराब जब्त की गई और इसके उल्लंघन के आरोपों में बड़ी संख्या में गिरफ्तारी भी हुई है, जिससे यह विवाद और बढ़ा है कि क्या कानून का प्रभावी क्रियान्वयन हो पा रहा है या नहीं।

इस मुद्दे पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है क्योंकि शराबबंदी एक संवेदनशील और सामाजिक प्रभाव वाला विषय है, और इसे लेकर अलग-अलग विचार और मत प्रकट किए जा रहे हैं।