Punjab News: चंडीगढ़, 17 जुलाई। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य के लोगों को केंद्र सरकार से लंबित वित्तीय बकाया जारी होने की उम्मीद थी, लेकिन इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
बकाया फंड जारी करने की मांग दोहराई
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार लंबे समय से ग्रामीण विकास निधि (RDF), मंडी फीस और अन्य लंबित वित्तीय बकाया जारी करने की मांग करती रही है। उनके अनुसार, राज्य सरकार ने कई बार केंद्र सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाया है, लेकिन अब तक लंबित राशि जारी नहीं की गई है।
राज्य सरकार की योजनाओं का किया जिक्र
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिलाओं के कल्याण से जुड़ी कई योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, मावां-धियां सत्कार योजना तथा युवाओं को सरकारी नौकरियां देने जैसी पहलों का उल्लेख किया।
नशा विरोधी अभियान और कानून व्यवस्था पर सरकार का दावा
चीमा ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान चलाया है। इसके साथ ही धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी विभिन्न कदम उठाए गए हैं।
विकास कार्यों और पूंजी निवेश का किया उल्लेख
प्रेस वार्ता में वित्त मंत्री ने दावा किया कि राज्य में सड़क, खेल मैदान, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
केंद्र-राज्य संबंधों पर भी उठाए सवाल
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य के वैध वित्तीय बकाया जल्द जारी किए जाने चाहिए ताकि विकास परियोजनाओं को और गति मिल सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष कई बार मांग रखी जा चुकी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी रहे चर्चा में
प्रेस वार्ता के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार और पूर्ववर्ती सरकारों पर विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए। वहीं, ये आरोप और दावे संबंधित पक्षों के सार्वजनिक राजनीतिक बयान हैं, जिन पर केंद्र सरकार की ओर से इस प्रेस वार्ता के संदर्भ में तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
