Punjab News: चंडीगढ़, 15 जुलाई। पंजाब सरकार ने बाल संरक्षण और दत्तक ग्रहण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी (SARA) ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 134 बच्चों को कानूनी रूप से सुरक्षित और स्नेहपूर्ण पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। साथ ही, ‘एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022’ को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।
हर जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी वाला पहला राज्य बना पंजाब
सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पंजाब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां प्रत्येक जिले में स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (SAA) स्थापित की गई है। वर्तमान में राज्य में कुल 26 एजेंसियां कार्यरत हैं, जिनमें 16 सरकारी और 10 गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा परिवार के स्नेह और सुरक्षा से वंचित न रहे।
तीन वर्षों में 134 बच्चों को मिला नया परिवार
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 87 अनाथ, परित्यक्त और सरेंडर किए गए बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद दिलाया गया। इनमें 66 बच्चों को भारत में और 21 बच्चों को विदेशों में दत्तक ग्रहण कराया गया। इसके अलावा 10 विशेष आवश्यकता (स्पेशल नीड्स) वाले बच्चों को भी परिवार मिला। वहीं, रिश्तेदारों और सौतेले माता-पिता के माध्यम से 47 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिया गया। इस प्रकार कुल 134 बच्चों को स्थायी पारिवारिक सुरक्षा और स्नेहपूर्ण वातावरण प्राप्त हुआ।
दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि बच्चों के समयबद्ध पुनर्वास और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों और स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में CARA और PGI विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) के प्रतिनिधि ने एडॉप्शन रेगुलेशंस-2022, CARINGS पोर्टल, दस्तावेजीकरण और समयबद्ध प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं पीजीआई चंडीगढ़ की विशेषज्ञों ने बच्चों की स्वास्थ्य जांच, मेडिकल मूल्यांकन और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया।
सभी हितधारकों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से उपायुक्तों के प्रतिनिधि, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, बाल कल्याण समितियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों, स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़ी चुनौतियों, उनके समाधान और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
