अगर आपके वाहन का ट्रैफिक चालान लंबे समय से लंबित है और कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने से बचना चाहते हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। दिल्ली में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष ट्रैफिक लोक अदालत आयोजित की जाएगी, जहां लोग अपने पुराने ट्रैफिक चालानों का आसान तरीके से निपटारा करा सकेंगे।
इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लंबित ट्रैफिक मामलों की संख्या कम करना और लोगों को सरल प्रक्रिया के माध्यम से राहत प्रदान करना है।
तीन दिनों तक चलेगी विशेष लोक अदालत
इस बार ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए केवल एक दिन नहीं, बल्कि लगातार तीन दिनों तक लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसका आयोजन दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DSLSA) द्वारा किया जाएगा।
इस दौरान वाहन मालिक अपने लंबित चालानों का निपटारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत करा सकेंगे।
पहले करना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
लोक अदालत में चालान का निपटारा कराने के लिए पहले से ऑनलाइन स्लॉट बुक करना अनिवार्य होगा।
इसके लिए वाहन मालिकों को—
- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस या DSLSA के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होगा।
- वाहन नंबर या चालान नंबर दर्ज कर स्लॉट बुक करना होगा।
- ऑनलाइन टोकन जनरेट करना होगा।
- चालान का प्रिंटआउट और वैध टोकन साथ लेकर अदालत पहुंचना होगा।
बिना टोकन और आवश्यक दस्तावेजों के अदालत में प्रवेश या चालान निपटारे की सुविधा नहीं मिलेगी।
किन चालानों का होगा निपटारा?
विशेष लोक अदालत में सामान्य ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- बिना हेलमेट वाहन चलाना
- सीट बेल्ट न लगाना
- ओवरस्पीडिंग
- गलत पार्किंग
- अन्य सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन
ऐसे मामलों में अदालत परिस्थितियों के अनुसार जुर्माने में राहत दे सकती है। कई मामलों में जुर्माना कम किया जा सकता है या समझौते के आधार पर मामला निपटाया जा सकता है।
इन मामलों में नहीं मिलेगी राहत
लोक अदालत में गंभीर अपराधों से जुड़े ट्रैफिक मामलों का निपटारा नहीं किया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- शराब पीकर वाहन चलाना (Drunk Driving)
- गंभीर सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामले
- अन्य गंभीर कानूनी अपराध
ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।
समय रहते करें तैयारी
यदि आपके वाहन पर कोई लंबित ट्रैफिक चालान है, तो लोक अदालत से पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक कर आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें। इससे बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के आपका मामला जल्दी निपट सकता है और कोर्ट के बार-बार चक्कर लगाने से भी बचा जा सकेगा.
