Bihar News: बिहार सरकार ने राजधानी पटना स्थित ऐतिहासिक मिलर हाई स्कूल के आधुनिकीकरण और धरोहर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में ऊर्जा विभाग ने परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीटीसीएल) और बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीजीसीएल) के वरिष्ठ अधिकारियों ने विद्यालय परिसर का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण किया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया विद्यालय का निरीक्षण
बीएसपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी, नगर आयुक्त यशपाल मीणा तथा बीएसपीजीसीएल के प्रबंध निदेशक विशाल राज ने तकनीकी टीम के साथ विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया। यह पूरा सर्वेक्षण ऊर्जा सचिव अजय यादव के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय के भवनों, आधारभूत संरचनाओं और उपलब्ध सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का विस्तृत तकनीकी आकलन किया गया।
धरोहर संरक्षण के साथ होगा आधुनिकीकरण
सर्वेक्षण के दौरान विद्यालय परिसर में मौजूद विभिन्न भवनों और संरचनाओं का परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने उनके संरक्षण, सुदृढ़ीकरण और आधुनिक सुविधाओं के विकास से जुड़े तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की।
सरकार का उद्देश्य विद्यालय की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक शिक्षा के अनुरूप विकसित करना है, ताकि विरासत और आधुनिक सुविधाओं का संतुलित समावेश सुनिश्चित किया जा सके।
समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य पर जोर
ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप परियोजना को गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। विभाग द्वारा सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग और नगर निगम भी जुड़े
निरीक्षण के दौरान विद्यालय की प्राचार्या किरण कुमारी के साथ शिक्षा विभाग और नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे। परियोजना के तहत सभी संबंधित विभाग मिलकर विद्यालय के व्यापक विकास और संरक्षण के लिए समन्वित रूप से कार्य करेंगे।
ऐतिहासिक विरासत को मिलेगा नया स्वरूप
मिलर हाई स्कूल बिहार के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में से एक है। प्रस्तावित परियोजना के पूरा होने के बाद विद्यालय न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखेगा, बल्कि आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से भी सुसज्जित होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध हो सकेगा।
