UP News: मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई दिशा देते हुए कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को भविष्य की शिक्षा नीति का आधार बनाने की पहल की है। इसी क्रम में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ और टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (TLPS) उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन बेसिक शिक्षा विभाग और Language and Learning Foundation (LLF) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें नीति-निर्माताओं, शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक चर्चा की।
शिक्षा सुधारों पर हुआ व्यापक मंथन
कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) Parth Sarathi Sen Sharma ने की।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक Monika Rani, एससीईआरटी के निदेशक Ganesh Kumar, बेसिक शिक्षा निदेशक Anil Bhushan Chaturvedi, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 और परख के निष्कर्षों पर चर्चा
प्रारंभिक सत्र में निपुण भारत मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में हुए शिक्षा सुधारों की प्रगति प्रस्तुत की गई।
इस दौरान निम्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई—
- निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा
- परख (PARAKH) के निष्कर्ष
- प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख पद्धतियां
- अधिगम में पिछड़े बच्चों के लिए 15 कैच-अप रणनीतियां
- हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड
- अकादमिक कैलेंडर
- अधिगम गुणवत्ता सुधार की रणनीतियां
टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 में सामने आई कक्षा-कक्ष की वास्तविक तस्वीर
कार्यक्रम में टीएलपीएस उत्तर प्रदेश रिपोर्ट-2025 का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (FLN) को मजबूत बनाने के लिए विद्यालयों में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट में कक्षा 1 और 2 के भाषा एवं गणित शिक्षण, कक्षा-कक्ष के वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शिक्षण समय के उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग और निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
यह अध्ययन नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर और बरेली के 200 विद्यालयों में किया गया था।
रिपोर्ट में प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, शिक्षक क्षमता विकास, बच्चों की सहभागिता और विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान करते हुए भविष्य की शिक्षा नीति को अधिक परिणामोन्मुख बनाने की दिशा सुझाई गई है।
प्रभावी शिक्षण पद्धतियों पर बनी साझा रणनीति
‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक और डेमो आधारित बनाने पर जोर दिया।
चर्चा के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष सहमति बनी—
- अधिगम में पीछे रह गए विद्यार्थियों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियां लागू करना।
- शिक्षकों की सतत अकादमिक मेंटरिंग को मजबूत करना।
- बच्चों में प्रश्न पूछने की झिझक और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण तैयार करना।
- ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा और अकादमिक सहयोग बढ़ाना।
शिक्षकों से सीधे संवाद में साझा हुए जमीनी अनुभव
कार्यक्रम के विशेष सत्र में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद किया।
इस दौरान आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, पठन अभियान, बहुस्तरीय कक्षाओं के संचालन, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए।
साक्ष्य आधारित शिक्षा नीति पर रहेगा आगे का फोकस
कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों का अगला चरण साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, शिक्षकों की क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी शिक्षा नीति की सफलता का वास्तविक पैमाना तभी माना जाएगा, जब उसका प्रभाव प्रत्येक बच्चे के सीखने के स्तर और शैक्षणिक गुणवत्ता में स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
