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Bihar News: बिहार पुलिस का सोशल मीडिया पर सख्त एक्शन, चार महीने में 128 एफआईआर दर्ज, 16 आरोपी गिरफ्तार

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Bihar News: बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, भ्रामक और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली सामग्री पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। मार्च से जून 2026 के बीच राज्यभर में ऐसे मामलों में 128 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इसके अलावा, आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वाले 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनलों को भी हटाया गया है।

चार महीने में 128 एफआईआर, 16 गिरफ्तार

बिहार पुलिस के अनुसार, मार्च से जून 2026 के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के मामलों में लगातार कार्रवाई की गई।

इस अवधि में—

  • 128 एफआईआर दर्ज की गईं।
  • 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
  • 9 सोशल मीडिया हैंडल, आईडी और चैनल हटाए गए।

पुलिस के मुताबिक, इन माध्यमों से संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, आम नागरिकों और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रामक तथा आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही थी।

453 टेकडाउन नोटिस जारी

बिहार पुलिस की साइबर इकाइयों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और संबंधित सेवा प्रदाताओं को 453 टेकडाउन नोटिस भी जारी किए।

इन नोटिसों के माध्यम से 856 आपत्तिजनक यूआरएल हटाने का अनुरोध किया गया, जिनमें से 823 यूआरएल सफलतापूर्वक हटाए जा चुके हैं।

संवैधानिक पदों से जुड़े पोस्ट पर विशेष निगरानी

पुलिस ने बताया कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और अन्य गणमान्य लोगों से संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

ऐसे मामलों में साइबर इकाइयों द्वारा लगातार निगरानी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

बिहार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, झूठी या भ्रामक जानकारी साझा करने अथवा किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

आम लोगों से की गई यह अपील

बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें।

यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध, आपत्तिजनक या भ्रामक पोस्ट दिखाई दे, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित साइबर थाना या पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आम नागरिकों की जागरूकता और सहभागिता से फेक न्यूज और भ्रामक सामग्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।