Punjab News: संगरूर से आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथों के उपयोग और सुरक्षित आवागमन के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के करोड़ों लोगों के सुरक्षित और सम्मानजनक आवागमन के अधिकार को मजबूत करता है।
संसद में पहले ही उठा चुके थे मुद्दा
मीत हेयर ने कहा कि उन्होंने 31 जुलाई 2025 को लोकसभा में राष्ट्रीय राजमार्गों पर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और अन्य गैर-मोटर चालित सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या सरकार इन लोगों के सुरक्षित आवागमन के अधिकार को मान्यता देती है और उनके लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी
सांसद मीत हेयर ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर केंद्र सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उनके अनुसार सरकार ने केवल दिशा-निर्देशों, सर्वेक्षणों और सड़क सुरक्षा ऑडिट का हवाला दिया, लेकिन पैदल यात्रियों के अधिकारों को लेकर कोई स्पष्ट नीति या ठोस योजना सामने नहीं रखी।
उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया है कि पैदल चलना केवल सुविधा नहीं बल्कि संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक अधिकार है।
पैदल यात्रियों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेगा लाभ
मीत हेयर ने कहा कि यह फैसला लाखों पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे भविष्य में बनने वाली सड़क परियोजनाओं में लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता मिलेगी और सुरक्षित फुटपाथ, सड़क पार करने के लिए उचित व्यवस्था तथा सार्वभौमिक पहुंच जैसी सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं, लोगों के लिए भी
उन्होंने कहा कि देश में सड़क अवसंरचना का विकास केवल वाहनों को ध्यान में रखकर नहीं होना चाहिए। सड़कें आम नागरिकों के लिए भी सुरक्षित और सुलभ होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसी सोच को मजबूत करता है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि पैदल चलना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत मिले आवागमन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। इसे अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 21 के साथ पढ़ा जाना चाहिए, इसलिए पैदल चलना एक मौलिक अधिकार है।
सुरक्षित और समावेशी परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
मीत हेयर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में सुरक्षित, समावेशी और मानव-केंद्रित परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इससे सरकारों और एजेंसियों को भविष्य की परियोजनाओं में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की प्रेरणा मिलेगी।
यह फैसला न केवल सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि हर नागरिक को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से चलने-फिरने का अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
