Greater Noida

Greater Noida: करोड़ों के फ्लैट लेकिन सुरक्षा के नाम पर मजाक, 37वीं मंजिल, दो मजदूर और टूटी सेफ्टी बेल्ट…हादसे की कहानी पढ़िए

दिल्ली NCR
Spread the love

Greater Noida में एक निर्माणाधीन हाईराइज प्रोजेक्ट में दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां 37वीं मंजिल पर काम कर रहे दो मजदूरों की ऊंचाई से गिरने के कारण मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों मजदूर सुरक्षा बेल्ट पहने हुए थे, लेकिन हादसे के दौरान बेल्ट टूट गई, जिससे उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

37वीं मंजिल पर चल रहा था निर्माण कार्य

बताया जा रहा है कि दोनों मजदूर निर्माणाधीन टावर की 37वीं मंजिल पर काम कर रहे थे। इसी दौरान जिस प्लेटफॉर्म पर वे कार्य कर रहे थे, उसमें तकनीकी खराबी आ गई और प्लेटफॉर्म नीचे गिर गया। मजदूरों को सुरक्षा बेल्ट से बांधा गया था, लेकिन गिरावट के दौरान बेल्ट भी उनका भार नहीं संभाल सकी।

मौके पर मची अफरा-तफरी

हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। सहकर्मी मजदूरों और परियोजना प्रबंधन ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन दोनों मजदूरों को नहीं बचाया जा सका। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी।

सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

यह घटना निर्माण क्षेत्र में श्रमिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुरक्षा बेल्ट उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, नियमित जांच और अन्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है।

निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूर अक्सर ऊंचाई पर जोखिम भरे माहौल में कार्य करते हैं, इसलिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा उपकरणों में कोई तकनीकी खामी थी या निर्माण एजेंसी की ओर से सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही बरती गई थी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

लगातार सामने आ रहे हैं निर्माण स्थल हादसे

पिछले कुछ वर्षों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में निर्माण स्थलों पर कई हादसे सामने आए हैं। ऐसे मामलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग लगातार उठती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सुरक्षा ऑडिट और श्रमिकों को प्रशिक्षण देने से ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह दर्दनाक घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विकास परियोजनाओं की गति के साथ श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।